गांधी के सत्य-अहिंसा और शास्त्री की सादगी को जीवन में उतारने का आह्वान
लखनऊ सूचना निदेशक विशाल सिंह के मार्गदर्शन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती शुक्रवार को सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ में हर्षोल्लास, श्रद्धा एवं गरिमापूर्ण वातावरण में मनाई गई। मुख्यालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ अपर निदेशक अरविन्द कुमार मिश्र ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया।
इसके बाद विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दोनों महान विभूतियों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी।कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ का सस्वर पाठ किया गया। भजन के माध्यम से उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गांधी जी के सत्य, अहिंसा, सेवा और मानवता के संदेश को स्मरण किया।अपने संबोधन में अपर निदेशक अरविन्द कुमार मिश्र ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा, त्याग और सादगी का प्रतीक है। उन्होंने सत्याग्रह के माध्यम से भारत को स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा और शांतिपूर्ण संघर्ष का मार्ग दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा कि गांधी जी का चरखा, उनकी लाठी और उनके विचार आज भी भारतीय जनमानस में जीवंत हैं। बापू ने यह संदेश दिया कि किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए साधनों की पवित्रता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। स्वच्छता के प्रति गांधी जी के आग्रह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।अपर निदेशक ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साधारण परिवार से आने वाले शास्त्री जी ने अपनी प्रतिभा, ईमानदारी, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचकर राष्ट्र का नेतृत्व किया।उन्होंने कहा कि शास्त्री जी द्वारा दिया गया अमर नारा ‘जय जवान, जय किसान’ आज भी देश की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने जवानों का मनोबल बढ़ाने के साथ किसानों को देश के अन्नदाता के रूप में सम्मान दिया। शास्त्री जी का जीवन सादगी, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में शुचिता की प्रेरणादायी मिसाल है।श्री मिश्र ने कहा कि यह विशेष संयोग है कि 2 अक्टूबर को देश की दो महान विभूतियों की जयंती मनाई जाती है, जिन्होंने भारत के इतिहास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों महापुरुषों ने अपने जीवन से सेवा, त्याग, सादगी और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रेरणा दी।उन्होंने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे गांधी जी के सत्य और अहिंसा तथा शास्त्री जी की सादगी एवं कर्तव्यनिष्ठा को अपनी कार्यशैली में अपनाएं। उन्होंने कहा कि सूचना विभाग सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों का दायित्व है कि वे पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।उन्होंने स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रप्रथम की भावना को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यही दोनों महान विभूतियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने तथा देश की एकता एवं अखंडता को बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में दोनों महापुरुषों के आदर्शों और उनके जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश दिया गया।इस अवसर पर वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी संजय कुमार सिंह, उपनिदेशक अनुराग प्रसाद, आत्रेय मिश्रा, सहायक निदेशक सतीश चन्द्र भारती, चन्द्र मोहन, डॉ. जितेन्द्र प्रताप सिंह, सी.एल. सिंह, प्रभात श्रीवास्तव, अमित कुमार यादव, निर्माता-फिल्म अभय कुमार श्रीवास्तव सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


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