महिला ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप सुल्तानपुर भाजपा विधायक विनोद सिंह ने आरोपों को बताया निराधार
सुल्तानपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक विनोद सिंह पर एक महिला ने बदसलूकी और दुष्कर्म के प्रयास का आरोप लगाया है। महिला ने सोमवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये आरोप लगाए।जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। दूसरी ओर मंगलवार को विधायक की ओर से भी एक प्रेस नोट जारी किया गया।जिसमें उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया है।पीड़िता ने आरोप लगाया कि 3 जून को लखनऊ स्थित एक अपार्टमेंट में जहाँ वह और विधायक दोनों रहते हैं।
विधायक ने उसे शराब के नशे में अपने गनर धनंजय यादव के ज़रिए बुलवाया। महिला के अनुसार वहाँ विधायक ने उसके साथ बदसलूकी और दुष्कर्म का प्रयास किया।महिला ने दावा किया कि विधायक का गनर लगातार उसे फ़ोन कर दबाव बनाता था। बात न मानने पर गनर ने उसकी 10 वर्षीय बेटी और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कराने तथा एसिड फेंकने की धमकी दी थी।पीड़िता के अनुसार न्याय की गुहार लगाने के बावजूद पुलिस द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई। इसके बजाय, उसके ख़िलाफ़ ही लखनऊ में धोखाधड़ी का एक काउंटर केस दर्ज करा दिया गया।धमकियों के डर से महिला 4 जून से अपने परिवार के साथ दिल्ली में शरण लिए हुए है। उसने बताया कि उसे अपनी लोकेशन ट्रैक होने की जानकारी मिली।जिसके बाद वह सुरक्षा के लिहाज़ से तुरंत अपने पति और बच्चे को लेकर वहाँ से हट गईं। महिला ने स्पष्ट किया कि वह विधायक के किसी अपार्टमेंट या एमएलए ऑफ़िस में नौकरी नहीं करती थीं।महिला ने बताया कि पहले जब भी विधायक द्वारा अनुचित व्यवहार या बातचीत की कोशिश की गई, तो उन्होंने उन्हें 'पिता तुल्य' और उम्र में बड़ा बताकर इसका विरोध किया था। उन्होंने इस बारे में अपने पति को भी बताया था, जिन्होंने बात करने की कोशिश की, लेकिन सत्ता और स्थानीय विधायक होने के दबाव के कारण उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई। पीड़िता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि महिलाओं, बेटियों और नाबालिगों के साथ ऐसा बर्ताव करने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाए।पीड़िता ने मामले में तत्काल एफ़आईआर दर्ज करने और आरोपी विधायक को मिल रहे प्रशासनिक संरक्षण को ख़त्म कर न्याय दिलाने की मांग की है।विधायक विनोद सिंह के अनुसार, कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के एक गांव के निवासी युवक और उसकी पत्नी लखनऊ स्थित एक अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल पर किराए के फ्लैट में रहते थे। क्षेत्रीय निवासी होने के नाते युवक ने उनसे संपर्क बढ़ाया और खुद को उच्च अधिकारियों से पहुंच वाला बताया।आरोपी ने दावा किया कि उसका भाई आईएएस अधिकारी है और पीएमओ में तैनात है तथा केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के चेयरमैन की नियुक्ति भी उसी ने कराई है। आरोपी ने एफसीआई का गोदाम दिलवाने और वेयरहाउस निर्माण का झांसा देकर कुछ कागजात तैयार करवाए। काफी समय बीतने के बाद जब काम नहीं हुआ, तो आरोपी ने विधायक को केंद्रीय भंडारण निगम के पैड पर एक अनापत्ति प्रमाणपत्र भेजा और पैसे की मांग की संदेह होने पर जब विनोद सिंह ने दिल्ली स्थित निगम कार्यालय से पत्र की जांच कराई, तो वह पूरी तरह फर्जी निकला। फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही आरोपी और उसकी पत्नी फोन बंद कर अपार्टमेंट छोड़कर फरार हो गए। इस पर विधायक ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में दोनों के खिलाफ जालसाजी का केस पंजीकृत कराया।विधायक ने बताया कि आरोपी शशांक पांडेय ने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने उसकी याचिका खारिज करते हुए उसे विवेचक के समक्ष प्रस्तुत करें। विनोद सिंह ने कहा कि अब गिरफ्तारी के डर से आरोपी दंपती महिला को आगे करके उनके ऊपर तरह-तरह के अनर्गल और चारित्रिक आरोप लगा रहे हैं।
विधायक ने उसे शराब के नशे में अपने गनर धनंजय यादव के ज़रिए बुलवाया। महिला के अनुसार वहाँ विधायक ने उसके साथ बदसलूकी और दुष्कर्म का प्रयास किया।महिला ने दावा किया कि विधायक का गनर लगातार उसे फ़ोन कर दबाव बनाता था। बात न मानने पर गनर ने उसकी 10 वर्षीय बेटी और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कराने तथा एसिड फेंकने की धमकी दी थी।पीड़िता के अनुसार न्याय की गुहार लगाने के बावजूद पुलिस द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई। इसके बजाय, उसके ख़िलाफ़ ही लखनऊ में धोखाधड़ी का एक काउंटर केस दर्ज करा दिया गया।धमकियों के डर से महिला 4 जून से अपने परिवार के साथ दिल्ली में शरण लिए हुए है। उसने बताया कि उसे अपनी लोकेशन ट्रैक होने की जानकारी मिली।जिसके बाद वह सुरक्षा के लिहाज़ से तुरंत अपने पति और बच्चे को लेकर वहाँ से हट गईं। महिला ने स्पष्ट किया कि वह विधायक के किसी अपार्टमेंट या एमएलए ऑफ़िस में नौकरी नहीं करती थीं।महिला ने बताया कि पहले जब भी विधायक द्वारा अनुचित व्यवहार या बातचीत की कोशिश की गई, तो उन्होंने उन्हें 'पिता तुल्य' और उम्र में बड़ा बताकर इसका विरोध किया था। उन्होंने इस बारे में अपने पति को भी बताया था, जिन्होंने बात करने की कोशिश की, लेकिन सत्ता और स्थानीय विधायक होने के दबाव के कारण उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई। पीड़िता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि महिलाओं, बेटियों और नाबालिगों के साथ ऐसा बर्ताव करने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाए।पीड़िता ने मामले में तत्काल एफ़आईआर दर्ज करने और आरोपी विधायक को मिल रहे प्रशासनिक संरक्षण को ख़त्म कर न्याय दिलाने की मांग की है।विधायक विनोद सिंह के अनुसार, कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के एक गांव के निवासी युवक और उसकी पत्नी लखनऊ स्थित एक अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल पर किराए के फ्लैट में रहते थे। क्षेत्रीय निवासी होने के नाते युवक ने उनसे संपर्क बढ़ाया और खुद को उच्च अधिकारियों से पहुंच वाला बताया।आरोपी ने दावा किया कि उसका भाई आईएएस अधिकारी है और पीएमओ में तैनात है तथा केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के चेयरमैन की नियुक्ति भी उसी ने कराई है। आरोपी ने एफसीआई का गोदाम दिलवाने और वेयरहाउस निर्माण का झांसा देकर कुछ कागजात तैयार करवाए। काफी समय बीतने के बाद जब काम नहीं हुआ, तो आरोपी ने विधायक को केंद्रीय भंडारण निगम के पैड पर एक अनापत्ति प्रमाणपत्र भेजा और पैसे की मांग की संदेह होने पर जब विनोद सिंह ने दिल्ली स्थित निगम कार्यालय से पत्र की जांच कराई, तो वह पूरी तरह फर्जी निकला। फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही आरोपी और उसकी पत्नी फोन बंद कर अपार्टमेंट छोड़कर फरार हो गए। इस पर विधायक ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में दोनों के खिलाफ जालसाजी का केस पंजीकृत कराया।विधायक ने बताया कि आरोपी शशांक पांडेय ने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने उसकी याचिका खारिज करते हुए उसे विवेचक के समक्ष प्रस्तुत करें। विनोद सिंह ने कहा कि अब गिरफ्तारी के डर से आरोपी दंपती महिला को आगे करके उनके ऊपर तरह-तरह के अनर्गल और चारित्रिक आरोप लगा रहे हैं।

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