वाराणसी शादी का झांसा देकर 700 लोगों से साइबर ठगी, फर्जी मैट्रिमोनियल गिरोह का भंडाफोड़; सरगना समेत 10 आरोपी गिरफ्तार
शादी के इच्छुक युवक-युवतियों को जीवनसाथी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का वाराणसी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कैंट पुलिस ने फर्जी 'शुभ मैट्रिमोनियल' के नाम से संचालित कॉल सेंटर पर छापा मारकर गिरोह की सरगना रागिनी देवी समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने उत्तर प्रदेश सहित सात राज्यों के करीब 700 युवक-युवतियों से लगभग 10 लाख रुपये की ठगी की है। सभी आरोपियों को मंगलवार को अदालत में पेश किया गया।जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।पुलिस के अनुसार विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी में फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर लोगों को विवाह कराने का झांसा दिया जाता था। पहले समाचार पत्रों में आकर्षक और भ्रामक वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कराए जाते थे। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों से आजीवन सदस्यता और पंजीकरण शुल्क के नाम पर हजारों रुपये जमा कराए जाते थे। रकम मिलने के बाद पीड़ितों का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था और किसी भी योग्य युवक या युवती का वास्तविक संपर्क उपलब्ध नहीं कराया जाता था।डीसीपी क्राइम ने बताया कि गिरोह के निशाने पर हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, चंडीगढ़, पंजाब, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के लोग थे। पुलिस ने गिरोह की सरगना रागिनी देवी के अलावा अराध्या शर्मा, ज्योति सिंह, रूबी, सपना यादव, महक, शमा, विधि श्रीवास्तव, रायमा परवीन और अजमत फातमा को गिरफ्तार किया है।एसीपी कैंट ने बताया कि एक महिला शिकायतकर्ता से चार किस्तों में 7,000 रुपये तथा दूसरे पीड़ित से 3,500 रुपये सदस्यता शुल्क के नाम पर वसूले गए थे। जांच में सामने आया कि यह पूरा कारोबार धोखाधड़ी के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा था। कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों को प्रतिदिन कम से कम 20 कॉल करने का लक्ष्य दिया जाता था और वसूली गई रकम के आधार पर उन्हें कमीशन भी दिया जाता था।छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 27 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, तीन चेकबुक, एक पासबुक, पांच डेबिट कार्ड, चार बिल वाउचर, तीन क्यूआर कोड, रजिस्टर, किरायानामा, उद्यम पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज और शुभ मैट्रिमोनियल के पंजीकरण फॉर्म बरामद किए हैं। पुलिस जब्त दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच कर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम का पता लगाने में जुटी है।एसीपी साइबर ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें। शुरुआती 'गोल्डन आवर' (पहले 1–2 घंटे) में शिकायत दर्ज कराने पर संबंधित बैंक खाते फ्रीज कर धनराशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। साथ ही गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें तथा ठग की प्रोफाइल, चैट, स्क्रीनशॉट, वॉयस रिकॉर्डिंग और बैंक ट्रांजेक्शन की रसीद जैसे सभी साक्ष्य सुरक्षित रखें।

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