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आयुष्मान भारत योजना में निजी अस्पतालों के पंजीकरण नियम सख्त, अब 50 बेड और एनएबीएच प्रमाणन अनिवार्य


लखनऊ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत निजी अस्पतालों के पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (SACHIS) ने गुणवत्ता मानकों को और सख्त करते हुए योजना में शामिल होने के लिए निजी अस्पतालों के लिए न्यूनतम 50 बेड तथा नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (NABH) का प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया है।नई व्यवस्था प्रदेश के 10 जनपदों में लागू कर दी गई है। इसके तहत अब कोई भी नया निजी अस्पताल तभी आयुष्मान भारत योजना के पैनल में शामिल हो सकेगा, जब वह 50 बेड की क्षमता और एनएबीएच मान्यता की शर्तों को पूरा करेगा।स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव छोटे और मध्यम श्रेणी के निजी अस्पतालों पर पड़ेगा। ऐसे अस्पतालों के लिए 50 बेड की क्षमता विकसित करना और एनएबीएच प्रमाणन प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इसके चलते कई अस्पताल योजना से जुड़ने से वंचित रह सकते हैं।साचीज ने पहले से आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध अस्पतालों को भी नई व्यवस्था के तहत राहत के साथ सख्त चेतावनी दी है। ऐसे अस्पतालों को छह माह के भीतर एनएबीएच प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। निर्धारित अवधि में प्रमाणपत्र जमा नहीं करने वाले अस्पतालों का अनुबंध समाप्त कर दिया जाएगा और उन्हें योजना के पैनल से बाहर कर दिया जाएगा।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आयुष्मान लाभार्थियों को बेहतर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। विभाग का मानना है कि पर्याप्त आधारभूत सुविधाओं, प्रशिक्षित स्टाफ और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करने वाले अस्पताल ही योजना के तहत बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, एनएबीएच प्रमाणन से अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, रिकॉर्ड प्रबंधन और उपचार की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ती है।हालांकि, 50 बेड की अनिवार्यता के कारण बड़ी संख्या में छोटे निजी अस्पताल योजना से बाहर हो सकते हैं। इससे आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के लिए उपचार के विकल्प सीमित होने की आशंका भी जताई जा रही है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़े अस्पतालों की संख्या कम है।आयुष्मान योजना के नोडल अधिकारी ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिले में योजना से जुड़ने की तैयारी कर रहे कई निजी अस्पतालों के आवेदन प्रभावित हो सकते हैं। जो अस्पताल निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पाएंगे, उनके आवेदन सीधे निरस्त कर दिए जाएंगे।उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजना के तहत लाभार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है और इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अस्पतालों को गुणवत्ता मानकों के अनुरूप अपनी सुविधाओं का विस्तार और उन्नयन करना होगा।

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