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सीएम योगी ने कहा- जेलें बनें सुधार और कौशल विकास का केंद्र, ‘ओपन जेल’ मॉडल पर विशेष जोर


लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कारागार विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि प्रदेश की जेलों को केवल बंदी रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कारागारों में सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, प्रशिक्षण, तकनीकी सुदृढ़ीकरण और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और सुधारात्मक गतिविधियों के जरिए जेलों को नई पहचान दी जाए।बैठक में बताया गया कि विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से बंदियों की समयपूर्व रिहाई को गति दी गई है।वर्ष 2012 से 2016 के बीच 273 बंदियों को समयपूर्व रिहाई मिली थी।वर्ष 2017 से 2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 हो गई।वर्ष 2022 से 2026 के बीच 3846 बंदियों को समयपूर्व रिहाई दी गई।इसके अलावा जुर्माना जमा कर रिहा होने वाले बंदियों की संख्या भी वर्ष 2012-16 के 2823 की तुलना में वर्ष 2017-2026 के दौरान बढ़कर 6231 हो गई।मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए कि 75 वर्ष से अधिक आयु के कैदियों, असाध्य रोगों से पीड़ित बंदियों, बच्चों के साथ जेल में बंद महिला कैदियों तथा जमानत राशि जमा न कर पाने के कारण जेल में बंद कैदियों की अलग सूची तैयार की जाए।

‘ओपन जेल’ मॉडल को बढ़ावा

मुख्यमंत्री योगी ने ‘ओपन जेल’ की अवधारणा को विशेष महत्व देते हुए इसे लागू करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेल केवल पेशेवर अपराधियों और माफिया के लिए होनी चाहिए, जबकि छोटे अपराधों में ‘ओपन जेल’ उपयोगी साबित हो सकती है।मुख्यमंत्री ने जेलों में भीड़ कम करने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और नए कारागारों व बैरकों के निर्माण की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि:

वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों की क्षमता 58,400 थी, जबकि बंदियों की संख्या 96,383 थी। उस समय ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी।वर्तमान में प्रदेश में 77 कारागार संचालित हैं, जिनकी क्षमता 77,673 है और बंदियों की संख्या 79,782 है। ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है। यूपी सरकार ने वर्ष 2017 से अब तक चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली सहित सात नए कारागार शुरू किए हैं, जिनसे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है।इसके अलावा अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में छह नए कारागारों का निर्माण कार्य जारी है, जिनकी कुल क्षमता 6,156 होगी। कई प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि क्रय और पंजीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला कारागारों के निर्माण को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों को और बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक प्रयासों के माध्यम से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।बैठक में बताया गया कि आगरा, नैनी, बरेली, वाराणसी, फतेहगढ़, गोरखपुर और उन्नाव समेत कई कारागारों में सिलाई, दरी, कंबल, फिनायल, काष्ठ कला, मसाला, प्रिंटिंग, हैंडीक्राफ्ट, रेडीमेड गारमेंट, एलईडी बल्ब, पॉटरी और कार्पेट जैसे उद्योग संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ आधारित इकाइयां भी संचालित हैं।मुख्यमंत्री ने जेलों में बंदियों के स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए योग, खेलकूद, कृषि और गौसंवर्धन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 17 जेलों में गौशालाएं संचालित हैं, जहां कुल 1265 गोवंश संरक्षित हैं। वहीं जेलों की कृषि भूमि वर्ष 2020 में 584.51 एकड़ से बढ़कर वर्तमान में 624.14 एकड़ हो गई है। कृषि फार्मों में सब्जी और आलू उत्पादन 81,270 क्विंटल से बढ़कर 86,720 क्विंटल तक पहुंच गया है।

भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

बैठक में जानकारी दी गई कि कारागार विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां दी जा चुकी हैं और विभिन्न पदों पर कुल 2868 पदोन्नतियां प्रदान की गई हैं। मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

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