झूठा मुकदमा दर्ज कराने वालों पर होगी कार्रवाई,DGP ने दिया आदेश
लखनऊ यूपी में झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में उत्तर प्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि यदि किसी प्राथमिकी (FIR) में दर्ज तथ्य विवेचना के दौरान असत्य या भ्रामक पाए जाते हैं। तो संबंधित शिकायतकर्ता तथा झूठी गवाही देने वालों के विरुद्ध अनिवार्य रूप से मुकदमा दर्ज किया जाए। DGP ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।यह कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 जनवरी को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है। हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि विवेचना के बाद यदि शिकायत में गलत तथ्य सामने आते हैं तो ऐसे मामलों की सूची तैयार की जाए और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधि के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि कई मामलों में शिकायतकर्ता द्वारा आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है। जबकि जांच में वास्तविक स्थिति भिन्न पाई जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।निर्देशों के तहत अब परिवाद दर्ज करने से पहले शिकायतकर्ता के बयान ऑडियो और वीडियो माध्यम से भी रिकॉर्ड किए जाएंगे ताकि बाद में तथ्यों से मुकरने या विरोधाभास की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रहे।साथ ही यदि किसी मामले में शिकायत झूठी पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने से पहले पर्यवेक्षण अधिकारी की स्वीकृति अनिवार्य होगी।प्रदेश में इस निर्णय को न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे झूठे मुकदमों पर अंकुश लगेगा और निर्दोष लोगों को अनावश्यक उत्पीड़न से राहत मिलेगी।

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