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यूपी में जन्म-मृत्यु पंजीकरण में देरी अब पड़ेगी भारी


लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 में संशोधन करते हुए विलंब शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी है। अब समय पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण न कराने वालों को पहले के मुकाबले दस गुना तक ज्यादा शुल्क देना होगा।नए संशोधन के मुताबिक यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 21 से 30 दिनों के भीतर कराया जाता है।तो पहले जहां 2 रुपये विलंब शुल्क देना पड़ता था। अब इसके लिए 20 रुपये देने होंगे। इसी प्रकार 30 दिन से 1 वर्ष के भीतर पंजीकरण कराने पर पहले 5 रुपये शुल्क लगता था। जिसे बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। वहीं एक साल से अधिक देरी होने पर अब 100 रुपये शुल्क देना होगा। जबकि पहले यह राशि केवल 10 रुपये थी।सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध और प्रभावी बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक बहुत कम विलंब शुल्क होने की वजह से लोग पंजीकरण को टालते रहते थे।जिससे सरकारी रिकॉर्ड और आंकड़ों में गड़बड़ी होती थी। इसके अलावा कई सरकारी योजनाओं, प्रमाण-पत्रों और अन्य दस्तावेजी प्रक्रियाओं में भी दिक्कतें आती थीं।सरकार को उम्मीद है कि नए नियम लागू होने के बाद अभिभावक बच्चों के जन्म के 21 दिनों के भीतर ही पंजीकरण कराने को प्राथमिकता देंगे। ताकि अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके। इसी तरह मृत्यु प्रमाण-पत्र समय पर जारी होने से परिवारों को संपत्ति हस्तांतरण, बीमा दावों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में आसानी होगी।यह संशोधन पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही इस संबंध में विस्तृत अधिसूचना जारी की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से आम लोगों पर कुछ अतिरिक्त आर्थिक बोझ जरूर पड़ेगा। लेकिन लंबे समय में इससे रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर होगा और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित बन सकेगी।

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