शाह-योगी मुलाकात के बाद यूपी में सियासी हलचल तेज
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ी थीं अटकलें
10 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए चेहरों को मंत्री बनाया गया था, जबकि दो राज्य मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। हालांकि चार दिन बीत जाने के बाद भी विभागों का आवंटन नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब शाह-योगी बैठक के बाद माना जा रहा है कि तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है।
मिशन-2027 को ध्यान में रखकर हो रहा विभागों का बंटवारा
इस बार विभागों का वितरण केवल प्रशासनिक आधार पर नहीं, बल्कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। भाजपा नेतृत्व सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता।पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं को मजबूत संदेश देने के लिए भूपेंद्र सिंह चौधरी को अहम भूमिका में आगे बढ़ा रही है। वहीं समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए मनोज पांडे के जरिए ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति बनाई गई है।इसके अलावाकृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूतजैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर दलित और पिछड़े वर्गों में भाजपा की पकड़ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
क्षेत्र और जातीय संतुलन पर विशेष फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अमित शाह ने नए मंत्रियों को ऐसे विभाग देने पर सहमति बनाई है। जिनसे वे अपने क्षेत्र और समुदाय में सरकार तथा भाजपा की छवि को और मजबूत कर सकें। इससे सरकार को विकास योजनाओं के प्रचार और राजनीतिक विस्तार दोनों में फायदा मिलने की उम्मीद है।
चुनावी तैयारियों को मिलेगी रफ्तार
विश्लेषकों के अनुसार, शाह-योगी की यह बैठक केवल विभाग बंटवारे तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह मिशन-2027 की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। भाजपा नेतृत्व अभी से सामाजिक समीकरणों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक मजबूती पर काम शुरू कर चुका है।अब माना जा रहा है कि विभागों की घोषणा होते ही योगी सरकार पूरी ताकत के साथ चुनावी मोड में नजर आएगी और प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी।

कोई टिप्पणी नहीं