डिजिटल जनगणना में पहली बार मोबाइल-इंटरनेट पर सवाल, 36 प्रश्नों की सूची तैयार
लखनऊ करीब पंद्रह वर्ष बाद होने जा रही जनगणना इस बार कई मायनों में खास होने जा रही है। पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से होने वाली इस जनगणना में मोबाइल और इंटरनेट उपयोग से जुड़े सवाल भी शामिल किए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जनगणना के दौरान लोगों से कुल लगभग 36 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें चार प्रश्न सीधे तौर पर मोबाइल और डेटा उपयोग से संबंधित होंगे।इस नई व्यवस्था के तहत हर व्यक्ति से पूछा जाएगा कि वह किस प्रकार का मोबाइल फोन इस्तेमाल करता है—साधारण मोबाइल या स्मार्टफोन। इसके अलावा यह भी जानकारी ली जाएगी कि मोबाइल में इंटरनेट का उपयोग किया जाता है या नहीं और यदि किया जाता है तो उसका स्तर क्या है।डिजिटल दौर में रेडियो सुनने की आदत भी बदल गई है। पहले जहां लोग पारंपरिक रेडियो सेट का उपयोग करते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग मोबाइल के जरिए ही रेडियो या ऑडियो कार्यक्रम सुनते हैं। इसी वजह से इस बार जनगणना में रेडियो उपयोग को भी मोबाइल से जोड़कर देखा जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि जिले में कितने लोग मोबाइल के माध्यम से रेडियो या ऑडियो सामग्री सुनते हैं।अनुमान के मुताबिक जिले की आबादी करीब 44 लाख के आसपास है। इनमें से लगभग 16 लाख से अधिक लोग मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि अभी तक मोबाइल उपभोक्ताओं का सटीक और सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। मोबाइल कंपनियों के पास अपने उपभोक्ताओं का पूरा डेटा होता है, लेकिन वह आम तौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाता।ऐसे में जनगणना के माध्यम से पहली बार सरकारी स्तर पर जिले में मोबाइल धारकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की वास्तविक संख्या सामने आ सकेगी।इस बार जनगणना की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी। प्रगणक मोबाइल ऐप या टैबलेट की मदद से घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। जैसे ही जानकारी दर्ज होगी, वह सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड हो जाएगी। इससे आंकड़ों के संकलन और विश्लेषण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी हो जाएगी।जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में परिवार और व्यक्तियों से संबंधित सामाजिक, आर्थिक और अन्य जानकारी दर्ज की जाएगी। इसी चरण में मोबाइल, इंटरनेट उपयोग, शिक्षा, रोजगार और अन्य विषयों से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल और इंटरनेट उपयोग से जुड़े आंकड़े सरकार के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। इससे यह पता चल सकेगा कि डिजिटल सेवाएं कितनी आबादी तक पहुंच रही हैं। साथ ही ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और अन्य तकनीकी योजनाओं की वास्तविक स्थिति का भी आकलन किया जा सकेगा।प्रशासन का कहना है कि जनगणना के दौरान नागरिकों को सही और सटीक जानकारी देनी चाहिए, ताकि सरकार के पास विकास योजनाओं की बेहतर योजना बनाने के लिए भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध हो सकें।

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