जंतर-मंतर आंदोलन का असर: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
NEET-UG 2026 पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के आंदोलन का बड़ा असर देखने को मिला।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। लगातार बढ़ते जनदबाव और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच उनका इस्तीफा देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।पिछले कई दिनों से हजारों छात्र जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन का नेतृत्व "कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)" के अभिजीत दिपके कर रहे थे, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार तनाव की स्थिति बनी, लाठीचार्ज और झड़पों की घटनाएं भी सामने आईं, लेकिन आंदोलन लगातार मजबूत होता गया।बताया जा रहा है कि इस्तीफा सौंपते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह नहीं चाहते कि मौजूदा परिस्थितियों का कोई गलत लाभ उठाए तथा छात्रों का भविष्य प्रभावित हो। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा होते ही जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया और इसे युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज की जीत बताया। हालांकि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनकी अन्य मांगों के पूरा होने तक आंदोलन जारी रहेगा।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई 2026 का यह घटनाक्रम देश में जेन-जी (Gen-Z) की लोकतांत्रिक भागीदारी और छात्र शक्ति के प्रभाव का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। विपक्षी दलों ने भी इसे छात्रों की एकजुटता की जीत बताया है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से शिक्षा मंत्रालय में जल्द नए नेतृत्व की नियुक्ति की संभावना जताई जा रही है।


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