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लखनऊ में बनेगी नई हाईटेक विधानसभा, कमल के आकार का होगा भवन


लखनऊ को जल्द ही एक नई और अत्याधुनिक विधानसभा मिलने जा रही है। गोमती नगर स्थित सहारा शहर क्षेत्र में करीब 200 एकड़ भूमि पर नए विधानसभा परिसर के निर्माण की तैयारी तेज हो गई है। शासन स्तर पर प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 2027 में निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। यह परियोजना न केवल प्रदेश की नई विधानसभा का निर्माण करेगी, बल्कि लखनऊ को एक नया वास्तुशिल्प (आर्किटेक्चरल) लैंडमार्क भी प्रदान करेगी।नई विधानसभा का डिजाइन भारतीय संस्कृति और उत्तर प्रदेश की पहचान को ध्यान में रखते हुए कमल के फूल की आकृति पर तैयार किया गया है। ऊपर से देखने पर मुख्य भवन कमल की पंखुड़ियों जैसा दिखाई देगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शासन को तीन अलग-अलग डिजाइन भेजे थे, जिनमें कमल के आकार वाले डिजाइन को अंतिम रूप दिया गया।प्रस्तावित परिसर में विधानसभा और विधान परिषद के लिए अलग-अलग आधुनिक भवन बनाए जाएंगे। विधानसभा सदन में 700 विधायकों के बैठने की क्षमता होगी, जबकि विधान परिषद सदन 200 सदस्यों के लिए तैयार किया जाएगा। दोनों सदनों को अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक, स्मार्ट ऑडियो-वीडियो सिस्टम और उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था से लैस किया जाएगा, ताकि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जा सके।परिसर में विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त सत्र के लिए लगभग 1,000 सीटों की क्षमता वाला विशाल सभागार भी बनाया जाएगा। इस हॉल का उपयोग विशेष सत्रों, महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों और अन्य बड़े आयोजनों के लिए किया जाएगा।नए विधानसभा परिसर में 5,000 से अधिक वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था होगी। इसके अलावा चौड़ी सड़कें, हरित क्षेत्र, प्रशासनिक कार्यालय, हाईटेक सुरक्षा प्रणाली, आधुनिक लैंडस्केपिंग और बेहतर यातायात प्रबंधन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।इस महत्वाकांक्षी परियोजना में केवल विधानसभा भवन ही नहीं, बल्कि आधुनिक सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास, विधायक हॉस्टल, वीवीआईपी प्रशासनिक ब्लॉक और विभिन्न जिलों के जनप्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग चर्चा कक्ष बनाए जाने का भी प्रस्ताव है। इससे प्रशासनिक कार्यों का संचालन अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगा।विशाल क्षेत्रफल, आधुनिक वास्तुकला, अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त यह नया विधानसभा परिसर उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को नई पहचान देगा। सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है और इसके पूरा होने के बाद यह लखनऊ की प्रमुख पहचान तथा प्रदेश के गौरव का प्रतीक बनेगी।

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