यूपी में एआई तकनीक से होगी छात्रवृत्ति व्यवस्था और पारदर्शी
लखनऊ उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण विभाग की योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। गुरुवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग और पिरामल फाउंडेशन फॉर एजुकेशन लीडरशिप के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य विभागीय योजनाओं के संचालन में आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और बेहतर प्रबंधन प्रणाली का उपयोग कर लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना है।एमओयू पर हस्ताक्षर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव तथा निदेशक समाज कल्याण संजीव सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुए। कार्यक्रम के दौरान पिरामल फाउंडेशन के कोर टीम सदस्य घनश्याम सोनी और अराधना खेतान ने अतिथियों का पौधा भेंट कर स्वागत किया। दोनों संस्थाओं के अधिकारियों ने भविष्य की कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की।योजनाधिकारी एवं उपनिदेशक समाज कल्याण आनंद कुमार सिंह ने बताया कि इस साझेदारी के पहले चरण में छात्रवृत्ति योजना को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। छात्रवृत्ति आवेदन से लेकर पात्र छात्रों के खाते में धनराशि पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इससे आवेदन प्रक्रिया सरल होगी, त्रुटियों में कमी आएगी और पात्र विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति मिल सकेगी।एमओयू के तहत राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशासनिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देकर योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे लाभार्थियों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।छात्रवृत्ति योजनाओं की निगरानी और संचालन को मजबूत बनाने के लिए स्कॉलरशिप प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (PMU) की स्थापना की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर जिला स्तर पर भी सहयोगी तंत्र विकसित किया जाएगा, जिससे योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो सके।कार्यक्रम में पिरामल फाउंडेशन की सीनियर प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. अनुपमा झा सहित समाज कल्याण विभाग और फाउंडेशन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस पहल को उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण योजनाओं के डिजिटलीकरण और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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