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सुल्तानपुर के डीएम का बड़ा खुलासा: रोजगार नहीं, बंदूक लाइसेंस की मांग लेकर पहुंच रहे युवा


लखनऊ उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने युवाओं की बदलती मानसिकता और प्राथमिकताओं को लेकर एक चिंताजनक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में युवा रोजगार, शिक्षा या कौशल विकास के अवसरों की जानकारी लेने के बजाय बंदूक का लाइसेंस बनवाने की मांग लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं।यह बात उन्होंने शनिवार को सुल्तानपुर शहर के पंडित राम नरेश त्रिपाठी सभागार में आयोजित 'भविष्य ज्योति 2026' सम्मान समारोह के दौरान कही। कार्यक्रम में उपस्थित एक मेधावी छात्रा ने जब उनसे प्रशासनिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती के बारे में पूछा तब जिलाधिकारी  ने यह अनुभव साझा किया।

रोजाना 5 से 10 युवा पहुंचते हैं

जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने बताया कि जब वे सुबह अपने कार्यालय में बैठते हैं, तो प्रतिदिन लगभग 5 से 10 युवा उनसे मिलने आते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है कि युवा नौकरी, स्वरोजगार, सरकारी योजनाओं, स्टार्टअप, शिक्षा या कौशल विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है।उन्होंने कहा कि मिलने आने वाले अधिकांश युवाओं की पहली और मुख्य मांग यही होती है कि उनका शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिया जाए। डीएम के अनुसार, उनमें से कोई भी ऐसा नहीं होता जो राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर का निशानेबाज हो या जिसे खेल गतिविधियों के लिए हथियार की आवश्यकता हो।

'भौकाल' और सामाजिक रौब का आकर्षण

डीएम ने कहा कि लाइसेंस की मांग करने वाले युवाओं का उद्देश्य मुख्य रूप से समाज में अपनी धाक जमाना और प्रभाव दिखाना होता है। वे चाहते हैं कि लोग उन्हें एक प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में देखें और यह संदेश जाए कि उनके पास बंदूक है।उनके अनुसार, कई युवाओं के बीच यह धारणा बन गई है कि हथियार रखना प्रतिष्ठा, ताकत और सामाजिक पहचान का प्रतीक है। यही कारण है कि वे रोजगार या करियर निर्माण से अधिक बंदूक लाइसेंस पाने में रुचि दिखा रहे हैं।

प्रशासन के लिए भी चुनौती

जिलाधिकारी ने इस प्रवृत्ति को प्रशासन के लिए एक अलग तरह की चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही दिशा में प्रेरित करना, उन्हें शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास की ओर आकर्षित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।उन्होंने संकेत दिया कि यदि युवाओं की ऊर्जा सकारात्मक दिशा में नहीं लगाई गई तो समाज में गलत प्राथमिकताओं का विस्तार हो सकता है। प्रशासन लगातार युवाओं को सरकारी योजनाओं, रोजगार मेलों, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी देने का प्रयास कर रहा है।

व्यापक सामाजिक संकेत

डीएम इंद्रजीत सिंह की टिप्पणी केवल सुल्तानपुर जिले तक सीमित नहीं मानी जा रही है। यह पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि युवाओं की आकांक्षाओं और सोच में किस प्रकार के बदलाव आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार, स्कूल, समाज और प्रशासन को मिलकर ऐसी मानसिकता विकसित करनी होगी जिसमें सफलता का पैमाना शिक्षा, रोजगार, नवाचार और सामाजिक योगदान बने, न कि हथियारों का प्रदर्शन।यह घटना युवाओं की प्राथमिकताओं पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता को उजागर करती है और यह सवाल खड़ा करती है कि आने वाली पीढ़ी अपने भविष्य को किस दिशा में ले जाना चाहती है।

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