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यूपी - 20 लाख जनधन खातों में एक पैसा नहीं


लखनऊ यूपी में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए खातों को लेकर एक चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। राज्य के आठ जिलों में करीब 20 लाख जनधन खाते ऐसे हैं जिनमें एक भी रुपया जमा नहीं है। इन खातों को लेकर अब बैंकिंग तंत्र में चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि इन्हें सक्रिय बनाए रखने में बैंकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

आठ जिलों में बड़ी संख्या में निष्क्रिय खाते

बैंकों द्वारा राज्य सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चार-चार जिलों में ये 20 लाख शून्य बैलेंस खाते मौजूद हैं। इन आठ जिलों में कुल मिलाकर 1.60 करोड़ से अधिक जनधन खाते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा निष्क्रिय पड़ा है।रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इन खातों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक है। राज्य में कुल जनधन खाताधारकों में करीब 53% महिलाएं हैं, जो वित्तीय समावेशन के लिहाज से सकारात्मक संकेत तो है, लेकिन निष्क्रियता एक बड़ी चुनौती बन रही है।

बैंकों पर सालाना 700 करोड़ का बोझ

शून्य बैलेंस वाले इन खातों को बनाए रखने के लिए बैंकों को हर साल लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर निष्क्रिय खातों का प्रबंधन करना संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।बैंकों ने इन खातों को अब “संदिग्ध” श्रेणी में डालना शुरू कर दिया है। दरअसल, लंबे समय से खाली पड़े खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधी “मनी म्यूल अकाउंट” के रूप में कर सकते हैं।

कैसे होता है दुरुपयोग?

लंबे समय से निष्क्रिय खाते में अचानक बड़ी रकम जमा होती है

कुछ ही समय में रकम निकाल ली जाती है

खाते में अपडेटेड KYC नहीं होता

फर्जी दस्तावेजों से संचालन की आशंका बढ़ती है

ऐसी गतिविधियां बैंकिंग प्रणाली के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही हैं।

यूपी की देश में सबसे बड़ी हिस्सेदारी

रिपोर्ट के अनुसार:

उत्तर प्रदेश में कुल जनधन खाते: 10.22 करोड़

पूरे देश में कुल खाते: 57.58 करोड़

यूपी की हिस्सेदारी: लगभग 18% (देश में सबसे अधिक)

कुल जमा राशि: 58 हजार करोड़ रुपये से अधिक

आठ जिलों में जमा राशि: करीब 7800 करोड़ रुपये

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि जनधन योजना का उद्देश्य गरीब और वंचित वर्ग को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना था, जो काफी हद तक सफल भी रहा है। लेकिन अब चुनौती इन खातों को सक्रिय बनाए रखने और इनके दुरुपयोग को रोकने की है।

आगे क्या?

बैंक और सरकार मिलकर अब ऐसे खातों की नियमित जांच, KYC अपडेट और जागरूकता अभियान पर जोर दे सकते हैं, ताकि:

खातों का सही उपयोग हो

साइबर अपराध पर रोक लगे

बैंकिंग व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ कम हो

निष्कर्ष:

जनधन योजना ने देश में वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है, लेकिन उत्तर प्रदेश के इन 20 लाख निष्क्रिय खातों ने एक नई समस्या खड़ी कर दी है। अब जरूरत है संतुलित रणनीति की, जिससे योजना के लाभ भी बने रहें और जोखिम भी कम हो सके।

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