75 साल बाद बना 'महामाघ' का अद्भुत संयोग
तीर्थराज प्रयागराज की पावन रेती पर आस्था, अध्यात्म और परंपरा का शंखनाद हो चुका है।शनिवार, 3 जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध माघ मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। कड़ाके की ठंड और कोहरे की चादर के बीच पहले ही दिन 31 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम में पुण्य की डुबकी लगाई। बता दें कि इस बार 75 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है कि इसे साधारण माघ नहीं बल्कि ‘महामाघ मेला’ कहा जा रहा है। जो इसे ऐतिहासिक बना रहा है।44 दिनों तक चलने वाले इस मेले का समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के साथ होगा।संगम तट पर जप, तप और दान की यह परंपरा कल्पवासियों के लिए मोक्ष का द्वार मानी जाती है। हर-हर गंगे और जय मां गंगा के उद्घोष, कड़ी सुरक्षा, आधुनिक सुविधाएं और दिव्य वातावरण ने साफ संकेत दे दिया है कि यह माघ मेला ऐतिहासिक बनने जा रहा है। माघ मेला क्षेत्र को 7 सेक्टरों में बांटा गया है. करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेले में 126 किलोमीटर लंबे मार्ग चेकर्ड प्लेट से तैयार किए गए हैं। रात के समय संगम क्षेत्र बेहद आकर्षक नजर आ रहा है नावों पर LED लाइट से सजी रंगीन छतरियां जल में 7 रंगों के फव्वारे और घाटों पर कलर-कोडेड चेंजिंग रूम अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं।

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