यूपी पंचायत चुनाव पर नया मोड़, OBC आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे ग्राम प्रधान
लखनऊ यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट की ओर से तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के आदेश के बाद अब ग्राम प्रधान संगठन इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। संगठन की मांग है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह लागू करने के बाद ही पंचायत चुनाव कराए जाएं। वहीं प्रदेश सरकार भी हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रही है और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना पर विधिक राय ले रही है।राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने गुरुवार को कहा कि संगठन हाईकोर्ट के उस निर्णय का स्वागत करता है, जिसमें पंचायत चुनाव होने तक प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के फैसले को सही ठहराया गया है। हालांकि, तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के आदेश से संगठन सहमत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आदेश के खिलाफ संगठन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा।अखिलेश सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। उनके मुताबिक, वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए यूपी सरकार ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन भी किया है।उन्होंने बताया कि आयोग को प्रदेश के सभी 75 जिलों का दौरा कर ओबीसी आरक्षण से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन करना है और अपनी रिपोर्ट देनी है। संगठन अध्यक्ष का दावा है कि अभी तक 10 जिलों के आंकड़े भी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। ऐसे में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी किए बिना पंचायत चुनाव कराने पर सवाल खड़े हो सकते हैं।संगठन का कहना है कि पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जानी चाहिए, ताकि आरक्षण व्यवस्था का उचित तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। इसी आधार पर संगठन चुनाव कराने की समयसीमा से जुड़े हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पंचायत और विधानसभा चुनावों की मतदाता सूचियों में विसंगतियां होने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि मतदाता सूची में मौजूद खामियों को दूर करना जरूरी है। ऐसी स्थिति में जल्दबाजी में पंचायत चुनाव कराना उचित नहीं होगा।संगठन का तर्क है कि चुनाव से पहले आरक्षण और मतदाता सूची से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए, जिससे चुनाव प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का विवाद न हो। इसी मांग को लेकर संगठन न्यायिक स्तर पर अपनी बात रखने की तैयारी में है।दूसरी ओर पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार भी आगे की रणनीति बनाने में जुटी है। पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गुरुवार को आदेश का अध्ययन करते रहे। सरकार की ओर से मामले में विधिक राय ली जा रही है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील या अन्य कानूनी विकल्प अपनाने पर निर्णय लिया जा सकता है।फिलहाल पंचायत चुनाव की समयसीमा, ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित विसंगतियों को लेकर स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं। ग्राम प्रधान संगठन ने जहां तीन महीने में चुनाव कराने के आदेश को चुनौती देने की बात कही है, वहीं सरकार की ओर से कानूनी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

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