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सीएम योगी का पुलिसकर्मियों को तोहफा, मोटरसाइकिल और वर्दी भत्ता बढ़ा


लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर प्रदेश के पुलिसकर्मियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। सीएम योगी ने फील्ड ड्यूटी में तैनात उपनिरीक्षक और निरीक्षक स्तर के पुलिसकर्मियों के मोटरसाइकिल भत्ते में वृद्धि करने के साथ ही पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के वर्दी भत्ते में भी बढ़ोतरी का ऐलान किया। सरकार के इस फैसले से फील्ड ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। सीएम योगी ने पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को राष्ट्र के लिए अमूल्य बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस के जवान देश की सुरक्षा, समाज में शांति और नागरिकों की रक्षा के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दे देते हैं। उनके त्याग और समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकता। सीएम योगी ने फील्ड ड्यूटी में तैनात उपनिरीक्षक और निरीक्षक स्तर के पुलिसकर्मियों के मोटरसाइकिल भत्ते को बढ़ाने की घोषणा की। अब इन पुलिसकर्मियों का मोटरसाइकिल भत्ता 700 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा।इसके साथ ही   पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के वर्दी भत्ते में भी वृद्धि की घोषणा की। पीपीएस संवर्ग के अधिकारियों का वर्दी भत्ता 6,400 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किए जाने का ऐलान किया गया। फील्ड ड्यूटी में तैनात आरक्षियों और मुख्य आरक्षियों का भत्ता 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की गई। इन फैसलों को पुलिसकर्मियों की कार्य परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि कुछ ऋण ऐसे होते हैं, जिन्हें कभी चुकाया नहीं जा सकता। शहीदों के प्रति राष्ट्र का ऋण भी ऐसा ही है। आज हम उन वीर पुलिसकर्मियों को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा, समाज की शांति और नागरिकों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।उन्होंने कहा कि शहीद पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करते हुए मन श्रद्धा और सम्मान से भर उठता है। उनके साहस पर हमारा मस्तक गर्व से ऊंचा होता है। उनके प्रति कृतज्ञता हमें अपने दायित्वों का भी बोध कराती है। सीएम योगी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की महानता इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने इतिहास, मूल्यों और उन लोगों के योगदान को कितना सम्मान देता है, जिनके त्याग से वर्तमान सुरक्षित होता है और भविष्य की नींव मजबूत बनती है। सीएम योगी ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब पुलिस का थानेदार या पुलिस अधीक्षक किसी अपराधी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले कई बार सोचता था।उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई होते ही सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे। कुछ ही घंटों के भीतर अपराधियों के बजाय कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कदम उठा लिए जाते थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर में पुलिस को अपराधियों के खिलाफ स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। थानों में जर्जर बैरक और गर्मी से तपती खपरैल की छतें थीं। उन्होंने पीएसी कंपनियों को बंद करने के कथित प्रयासों का भी उल्लेख किया।सीएम योगी ने कहा कि उस समय अपराधी खुलेआम स्वचालित हथियारों का प्रदर्शन करते थे, जबकि पुलिस के जवान पुराने हथियारों के साथ अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष करते थे। अपराधियों का समानांतर राज कायम हो गया था और कानून तमाशबीन बनकर रह गया था।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में हुए दंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में प्रदेश में 815 दंगे हुए। उनके मुताबिक, हर दंगे का असर गरीबों की दुकानों, मजदूरों की दिहाड़ी और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता था।उन्होंने मथुरा के जवाहरबाग कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में पुलिस अधिकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिसकर्मियों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।सीएम योगी ने कहा कि कानून-व्यवस्था किसी भी प्रदेश के विकास की बुनियादी शर्त है। यदि समाज में भय और अराजकता का माहौल होगा, तो गरीब, व्यापारी, महिलाएं और आम नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकेंगे।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद उनकी सरकार ने पुलिस के कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप की व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास किया। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि गरीब, पीड़ित, व्यापारी और बहन-बेटियों के सम्मान की सुरक्षा उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज में आतंक फैलाने वाले अपराधियों, माफिया और दंगाइयों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून का शासन स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता है। पुलिस को निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए और आम नागरिकों को न्याय एवं सुरक्षा का भरोसा दिलाना चाहिए।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर को लेकर सवाल उठाने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग पुलिस की कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़े करते हैं, वे कई बार दुर्दांत माफिया और आतंकियों की मौत पर संवेदना व्यक्त करते दिखाई देते हैं।उन्होंने कहा कि जब इन्हीं अपराधियों की गोलियों से कोई निर्दोष पुलिसकर्मी शहीद होता है, तब उसके परिवार और अनाथ बच्चों के प्रति वैसी संवेदना दिखाई नहीं देती।मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों के बलिदान को राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। देश और समाज की सुरक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों तथा उनके परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री की घोषणाओं में पुलिसकर्मियों के भत्तों में वृद्धि प्रमुख रही। मोटरसाइकिल भत्ते और वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी से फील्ड ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिसकर्मियों को नमन करते हुए उनके त्याग, साहस और कर्तव्यनिष्ठा को याद किया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी केवल अपराधियों पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों, पीड़ितों और आम नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा देना भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

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