न्यायालय प्रोटोकाल पर सरकार का कड़ा रुख, अफसरों की पोशाक और फोटो को लेकर निर्देश
लखनऊ यूपी सरकार ने न्यायालयों में अधिकारियों की पेशी और शपथ पत्र से जुड़े प्रोटोकाल को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने वाले अधिकारियों के साथ-साथ वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने वाले अधिकारियों को भी निर्धारित ड्रेस कोड का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय की कार्यवाही के दौरान अधिकारियों की वेशभूषा औपचारिक और मर्यादित होनी चाहिए।नियुक्ति विभाग के विशेष सचिव विजय कुमार की ओर से इस संबंध में सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों समेत संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। इसमें न्यायालय के प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार के निर्देश के मुताबिक अधिकारी न्यायालय में भौतिक रूप से उपस्थित हों या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हों, दोनों परिस्थितियों में निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना होगा। वर्चुअल सुनवाई के दौरान भी अधिकारियों की वेशभूषा ऐसी होनी चाहिए, जो न्यायालय की गरिमा और प्रोटोकाल के अनुरूप हो।सरकार ने व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ लगाए जाने वाले फोटोग्राफ को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। शपथ पत्र पर लगाया जाने वाला फोटो नवीनतम होना चाहिए और उसमें अधिकारी उचित एवं औपचारिक ड्रेस में नजर आना चाहिए। फोटो में भड़कीले कपड़े, खुले बाल, रंगीन चश्मे अथवा सनग्लास स्वीकार नहीं किए जाएंगे।निर्देशों का उद्देश्य न्यायालय में प्रस्तुत होने वाले दस्तावेजों और अधिकारियों की उपस्थिति को निर्धारित प्रोटोकाल के अनुरूप बनाए रखना है।सरकार ने शपथ पत्र से संबंधित हस्ताक्षर प्रक्रिया को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। शपथ पत्र देने वाले अधिकारी, शपथ आयुक्त अथवा नोटरी द्वारा हस्ताक्षर के लिए केवल नीली स्याही का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा शपथ आयुक्त या नोटरी की मुहर के रंग को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है।मुहर में काली, लाल, हरी अथवा किसी अन्य रंग की स्याही का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अधिकारियों को इन सभी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।सरकार ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि न्यायालय में पेशी के दौरान निर्धारित प्रोटोकाल का किसी भी स्तर पर उल्लंघन न हो। ड्रेस कोड, शपथ पत्र पर फोटो और हस्ताक्षर व मुहर के रंग से जुड़े इन निर्देशों को इसी व्यवस्था का हिस्सा माना गया है। मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को अपने अधीनस्थ अधिकारियों तक इन दिशा-निर्देशों की जानकारी पहुंचाने और उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।

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