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तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव, अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब


सुल्तानपुर छत्तीसगढ़ के रायपुर में वीरगति को प्राप्त हुए शहीद जवान आनंद प्रकाश तिवारी का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक गांव कुड़वार थाना क्षेत्र के नेवरा खादर बसंतपुर पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया।

तिरंगे में लिपटे वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और क्षेत्रवासी उमड़ पड़े। हर आंख नम थी और चारों ओर भारत माता की जय तथा शहीद अमर रहें के नारे गूंज रहे थे।पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही शहीद के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां, पिता, पत्नी और अन्य परिजनों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे।

परिजनों की करुण पुकार से माहौल बेहद भावुक हो उठा। ग्रामीणों ने शहीद जवान के अंतिम दर्शन कर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए और देश की सेवा में दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।शहीद आनंद प्रकाश तिवारी की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। युवाओं और ग्रामीणों ने हाथों में तिरंगा लेकर वीर जवान को अंतिम सलामी दी।

अंतिम यात्रा के दौरान 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम्' और 'शहीद अमर रहें' के नारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। लोगों में अपने वीर सपूत के प्रति सम्मान और श्रद्धा का भाव साफ दिखाई दिया।गांव से शहीद जवान की अंतिम यात्रा पूरे सम्मान के साथ कुड़वार राजघाट के लिए रवाना हुई। रास्ते में भी बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। क्षेत्रवासियों ने कहा कि देश की सुरक्षा और सेवा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।कुड़वार राजघाट पर सैन्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शहीद जवान आनंद प्रकाश तिवारी का अंतिम संस्कार राष्ट्रीय सम्मान के साथ किया गया। जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई और राष्ट्रीय ध्वज को परिजनों को सौंपा गया।शहीद की अंतिम विदाई का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला रहा। अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम थीं। हर कोई वीर जवान के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देश के प्रति समर्पण को नमन कर रहा था।क्षेत्रवासियों ने कहा कि आनंद प्रकाश तिवारी ने देश की सेवा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उन्होंने अपने साहस और कर्तव्यनिष्ठा से न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे कुड़वार क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा किया है।

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