सुल्तानपुर में मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में अयोध्या के महंत बृज मोहन दास ने रखे विचार, माता-पिता और गुरु के महत्व पर भी दिया संदेश
सुल्तानपुर कुड़वार थाना क्षेत्र के भंडरा परशुरामपुर के मझारी पश्चिम में शुक्रवार शाम कपिल देव दुबे की मूर्ति का अनावरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अयोध्या के महंत बृज मोहन दास शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी राय रखी।महंत बृज मोहन दास ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को समाप्त किए जाने की मांग का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि यूजीसी की व्यवस्था कहीं न कहीं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता की ओर से भी सरकार से इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की जा रही है और सरकार को इस पर विचार करते हुए मांग को स्वीकार करना चाहिए।प्रदेश में सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों के दौरान मंदिर-मस्जिद समेत धार्मिक स्थलों पर हो रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर पूछे गए सवाल पर महंत ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर सड़क चौड़ीकरण से आवागमन सुगम होता है और दुर्घटनाओं में कमी आती है, तो मानव हित में किया गया ऐसा कार्य उचित है।
उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा और सुरक्षा के लिए कई बार मंदिरों को भी हटाया जाता है। उनके मुताबिक, यदि किसी विकास कार्य से लोगों को आने-जाने में सुविधा मिलती है और दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है, तो व्यापक जनहित को ध्यान में रखा जाना चाहिए।महंत बृज मोहन दास ने बातचीत के दौरान माता-पिता और गुरु के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में माता-पिता और गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता-पिता ही व्यक्ति के प्रथम गुरु होते हैं, जबकि धर्म गुरु जीवन को सही दिशा देने का कार्य करते हैं।उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने पिता का सम्मान करना चाहिए और उन्हें जीवन में ऊंचा स्थान देना चाहिए। भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम ने पिता को दिए वचन को निभाने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया।लेकिन पिता के मान-सम्मान को कम नहीं होने दिया।अयोध्या के महत्व पर बोलते हुए महंत ने कहा कि अयोध्या सदियों से पूरे विश्व को जीवन जीने का मार्ग दिखाती रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या लोगों को जीवन के आदर्शों और मर्यादा का संदेश देती है। अयोध्या के दर्शन को उन्होंने सौभाग्य की बात बताते हुए कहा कि इससे जीवन धन्य हो जाता है। वहीं, मां सरयू में स्नान को उन्होंने धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए कहा कि इससे मनुष्य के पापों का नाश होता है।कार्यक्रम में पूर्व ब्लॉक प्रमुख यश भद्र सिंह मोनू, इंद्रसेन दुबे, सत्य नारायण दुबे, दिवाकर दुबे, देवेश शर्मा, कमल सेन दुबे सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा और सुरक्षा के लिए कई बार मंदिरों को भी हटाया जाता है। उनके मुताबिक, यदि किसी विकास कार्य से लोगों को आने-जाने में सुविधा मिलती है और दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है, तो व्यापक जनहित को ध्यान में रखा जाना चाहिए।महंत बृज मोहन दास ने बातचीत के दौरान माता-पिता और गुरु के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में माता-पिता और गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता-पिता ही व्यक्ति के प्रथम गुरु होते हैं, जबकि धर्म गुरु जीवन को सही दिशा देने का कार्य करते हैं।उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने पिता का सम्मान करना चाहिए और उन्हें जीवन में ऊंचा स्थान देना चाहिए। भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम ने पिता को दिए वचन को निभाने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया।लेकिन पिता के मान-सम्मान को कम नहीं होने दिया।अयोध्या के महत्व पर बोलते हुए महंत ने कहा कि अयोध्या सदियों से पूरे विश्व को जीवन जीने का मार्ग दिखाती रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या लोगों को जीवन के आदर्शों और मर्यादा का संदेश देती है। अयोध्या के दर्शन को उन्होंने सौभाग्य की बात बताते हुए कहा कि इससे जीवन धन्य हो जाता है। वहीं, मां सरयू में स्नान को उन्होंने धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए कहा कि इससे मनुष्य के पापों का नाश होता है।कार्यक्रम में पूर्व ब्लॉक प्रमुख यश भद्र सिंह मोनू, इंद्रसेन दुबे, सत्य नारायण दुबे, दिवाकर दुबे, देवेश शर्मा, कमल सेन दुबे सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



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