नव भारत साक्षरता अभियान के अन्तर्गत यूपी के 11.69 लाख लोग हुए साक्षर
लखनऊ उत्तर प्रदेश में शिक्षा को केवल विद्यालयों और महाविद्यालयों तक सीमित न रखकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास लगातार तेज गति से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन, आत्मनिर्भरता और जनसशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए अनेक अभिनव कार्य शुरू किये हैं। इन्हीं प्रयासों की श्रृंखला में संचालित नव भारत साक्षरता कार्यक्रम आज लाखों लोगों के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और नए अवसरों का संचार कर रहा है।निरक्षरता केवल अक्षरों को न पहचान पाने की स्थिति नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत विकास की राह में एक बड़ी बाधा भी होती है। जो व्यक्ति पढ़ना-लिखना नहीं जानता, वह सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने, बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करने, स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों को समझने, बच्चों की शिक्षा में सहयोग देने और आधुनिक तकनीकी संसाधनों का लाभ उठाने में कठिनाई महसूस करता है। ऐसे में साक्षरता केवल शिक्षा नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भरता की कुंजी बन जाती है।इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश में 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर नागरिकों को साक्षर बनाने के लिए व्यापक स्तर पर ‘‘नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’’ संचालित किया जा रहा है। इस अभियान ने बीते वर्षों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक आयोजित साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाओं में कुल 13,81,530 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से 11,68,292 प्रतिभागियों ने सफलतापूर्वक साक्षरता प्राप्त की। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की कहानी भी है।प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति शिक्षा से जुड़ा हो। यही कारण है कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, निपुण भारत मिशन को लागू करने और उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार के साथ-साथ वयस्क साक्षरता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नव भारत साक्षरता कार्यक्रम इसी व्यापक दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सामुदायिक भागीदारी है। कार्यक्रम के अंतर्गत पहले असाक्षर व्यक्तियों की पहचान की जाती है। इसके बाद प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा वालंटियर्स को प्रशिक्षण दिया जाता है। यही वालंटियर्स गांवों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों में साक्षरता कक्षाओं का संचालन करते हैं। शिक्षण कार्य ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित किया जाता है, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।कार्यक्रम का उद्देश्य केवल लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को गणना, दैनिक जीवन में उपयोगी जानकारी, वित्तीय साक्षरता, सामाजिक जागरूकता और नागरिक कर्तव्यों से भी परिचित कराया जाता है। इससे वे न केवल अक्षर ज्ञान प्राप्त करते हैं, बल्कि अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अधिक आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेने में सक्षम बनते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में वयस्क साक्षरता अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करना एक बड़ी चुनौती है। प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे लोग हैं जो आर्थिक, सामाजिक या पारिवारिक कारणों से कभी विद्यालय नहीं जा सके। कई महिलाओं को भी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला। नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ने ऐसे लोगों तक पहुंचकर उन्हें शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।इस साक्षरता कार्यक्रम में विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी इस अभियान की बड़ी उपलब्धि रही है। जब कोई महिला साक्षर बनती है तो उसका प्रभाव केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। साक्षर महिला अपने बच्चों की शिक्षा के प्रति अधिक जागरूक होती है, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को बेहतर ढंग से समझती है और आर्थिक गतिविधियों में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकती है। इस दृष्टि से यह अभियान महिला सशक्तीकरण का भी एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। साक्षरता का सीधा संबंध आर्थिक विकास से भी है। आज के समय में बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान, सरकारी योजनाओं और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए बुनियादी शिक्षा आवश्यक हो गई है। साक्षर व्यक्ति सरकारी दस्तावेजों को समझ सकता है, आवेदन पत्र भर सकता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकता है। इससे उसकी आर्थिक भागीदारी बढ़ती है और आत्मनिर्भरता को बल मिलता है।प्रदेश में अब तक आयोजित सात साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाएं इस कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण हैं। वर्ष 2022-23 में जहां लगभग 1.46 लाख प्रतिभागियों ने परीक्षा में भाग लिया, वहीं वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 4.01 लाख से अधिक हो गई। समाज के इस अभियान के प्रति लोगों का विश्वास और सहभागिता लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में प्रतिभागियों का सफल होना यह भी बताता है कि साक्षरता कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक परिणाम देने वाला अभियान बन चुका है। योगी सरकार वर्ष 2026-27 में इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाने की तैयारी कर रही है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी जनपदों को 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें साक्षर बनाने का लक्ष्य सौंपा गया है। इसके लिए वालंटियर्स और मास्टर ट्रेनर्स का नेटवर्क और मजबूत किया जा रहा है। साथ ही अभियान की नियमित मॉनिटरिंग और मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सके।यह अभियान सामाजिक समरसता और समावेशी विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिक्षा का लाभ समाज के उन वर्गों तक पहुंच रहा है जो लंबे समय तक इससे वंचित रहे। इससे सामाजिक असमानताओं को कम करने और समान अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। शिक्षा के माध्यम से नागरिक अधिक जागरूक बन रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी भी बढ़ रही है। आज जब उत्तर प्रदेश शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तीकरण और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है, तब नव भारत साक्षरता कार्यक्रम इस परिवर्तन की मजबूत नींव के रूप में सामने आया है। यह अभियान केवल निरक्षरता दूर करने का प्रयास नहीं, बल्कि एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में कदम है जहां प्रत्येक नागरिक शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर हो। आने वाले वर्षों में यह अभियान और अधिक लोगों के जीवन में शिक्षा का प्रकाश पहुंचाएगा तथा आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त उत्तर प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा। शिक्षा के इस महाअभियान ने यह साबित कर दिया है कि अक्षर ज्ञान केवल शब्दों को पढ़ने की क्षमता नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाली शक्ति है।

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