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राम मंदिर दान गबन प्रकरण: शासन ने गठित की तीन सदस्यीय SIT


लखनऊ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या के दानपात्र में जमा चंदे की राशि में कथित गबन के मामले को अब उत्तर प्रदेश शासन ने गंभीरता से लेते हुए अपने स्तर पर संज्ञान में लिया है। शनिवार को शासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया। SIT को सात दिन के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।जानकारी के अनुसार करीब एक सप्ताह पहले राम मंदिर के दानपात्र से धन के गबन का मामला सामने आया था। तब से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आंतरिक और गोपनीय तरीके से मामले की जांच कर रहा था। हालांकि पुलिस की औपचारिक भूमिका नहीं थी लेकिन ट्रस्ट के पदाधिकारी पुलिस की सहायता से संदिग्धों से पूछताछ और धन की रिकवरी के प्रयास में जुटे थे।शनिवार को ट्रस्ट की ओर से मुख्यमंत्री योगी को पत्र भेजकर मामले की जांच SIT से कराने की मांग की गई थी। इसके बाद देर शाम शासन ने जांच दल के गठन का आदेश जारी कर दिया।गठित SIT में विशेष सचिव वित्त नील रतन, लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और लखनऊ रेंज की आईजी किरन एस को शामिल किया गया है। जांच दल को मामले की सभी परिस्थितियों, साक्ष्यों और संभावित जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।सूत्रों के मुताबिक SIT की टीम रविवार को अयोध्या पहुंच सकती है। जांच दल अब तक पकड़े गए संदिग्धों से पूछताछ करेगा और ट्रस्ट तथा अन्य एजेंसियों द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेकर उनका परीक्षण करेगा। साथ ही ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों से भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की जाएगी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की जांच को दिशा दी जाएगी।इसी बीच दान गबन मामले की जांच के दौरान शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी अयोध्या पहुंचे। उनके दौरे को लेकर यह उम्मीद जताई जा रही थी कि वह दान विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।लेकिन उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पत्रकारों द्वारा दान गड़बड़ी प्रकरण से संबंधित सवाल पूछे जाने पर उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, "मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं और कुछ नहीं।" इसके बाद उन्होंने इस मामले से जुड़े किसी भी अन्य प्रश्न का उत्तर नहीं दिया।शासन द्वारा सात दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट मांगे जाने के कारण जांच प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दानपात्र से धन गबन की घटना कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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