RTI सूचना देने में एक वर्ष की देरी पर राज्य सूचना आयोग का बड़ा फैसला, 3 अधिकारियों पर 25 हजार का जुर्माना
उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग, लखनऊ में राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत दायर एक शिकायत की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया है। आयोग ने सूचना उपलब्ध कराने में अत्यधिक विलम्ब तथा अधिनियम के प्रावधानों की अवहेलना को गंभीर मानते हुए तीन अधिकारियों पर संयुक्त रूप से ₹25,000 का अर्थदण्ड अधिरोपित किया है।प्रकरण के अनुसार, शिकायतकर्ता कुलदीप कुमार चतुर्वेदी ने दिनांक 24 जून 2022 को कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, औरैया में सूचना प्राप्त करने हेतु आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया था। अभिलेखों के परीक्षण में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित जनसूचना अधिकारी द्वारा अधिनियम में निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। बाद में लगभग एक वर्ष की देरी के बाद दिनांक 26 जुलाई 2023 को सूचना प्रदान की गई।सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि सूचना देने में हुई देरी के संबंध में संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा-20 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर अधिकारियों को कई अवसर दिए, किन्तु विलम्ब के कारणों का समुचित उत्तर नहीं दिया गया।आयोग ने यह भी पाया कि उपलब्ध कराई गई सूचना में धारा 8(1) के प्रावधानों का अनुचित एवं असंगत आधार पर उपयोग किया गया था। आयोग ने इसे भी गंभीर अनियमितता माना। अपने आदेश में आयोग ने स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है तथा सूचना उपलब्ध कराने में अनावश्यक विलम्ब या भ्रामक जानकारी देना अधिनियम की भावना के विपरीत है।उपलब्ध तथ्यों एवं अभिलेखों के आधार पर आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा-20(1) के अंतर्गत तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, औरैया जी.एस. राजपूत (वर्तमान में प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, औरैया), तत्कालीन जनसूचना अधिकारी/जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, औरैया अनिल कुमार (वर्तमान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रयागराज) तथा वर्तमान जनसूचना अधिकारी/जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, औरैया संजीव कुमार पर संयुक्त रूप से ₹25,000 (पच्चीस हजार रुपये) का अर्थदण्ड अधिरोपित किया है।आयोग ने निर्देश दिया है कि अधिरोपित अर्थदण्ड की राशि तीनों अधिकारियों के वेतन से समान रूप से, अर्थात प्रत्येक से एक-तिहाई भाग, वसूल की जाए। साथ ही आदेश की प्रति जिलाधिकारी, औरैया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रेषित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।राज्य सूचना आयोग ने अर्थदण्ड अधिरोपित किए जाने के उपरांत शिकायत का निस्तारण करते हुए नियमानुसार वसूली की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग का यह निर्णय सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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