राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: अयोध्या के वकीलों ने आरोपियों की पैरवी से किया इनकार
राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों को कानूनी पैरवी के लिए अयोध्या में वकील मिलना मुश्किल हो गया है। सोमवार को फैजाबाद बार एसोसिएशन की आमसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह फैसला लिया गया कि मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले में गिरफ्तार आरोपियों का कोई भी अधिवक्ता मुकदमा नहीं लड़ेगा।फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने बताया कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय सोमवार की आमसभा में लिया गया।जिसमें अधिवक्ताओं ने एकमत से आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कानून का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है।उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2005 में भी अयोध्या के अधिवक्ताओं ने इसी तरह का निर्णय लिया था, जब राम जन्मभूमि परिसर पर हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का सामूहिक फैसला किया गया था।बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन की घटना से पूरे अधिवक्ता समाज में गहरा आक्रोश है। उन्होंने कहा कि सभी अधिवक्ताओं ने आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने पर सहमति जताई है और अब आगे की रणनीति भी इसी के अनुरूप तय की जाएगी।इस बीच, कई अधिवक्ताओं ने आरोपियों को कथित रूप से "गुपचुप तरीके" से रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने पर भी नाराजगी जताई। अधिवक्ता विवेक कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस को आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच सीधे अदालत में पेश नहीं करना चाहिए था। उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल की तरह पहले उन्हें जनता के सामने लाया जाना चाहिए था।वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि कुछ लोगों की हरकतों के कारण अयोध्या की छवि देश और दुनिया में धूमिल हुई है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस मामले में बुलडोजर नीति जैसे सख्त कदमों पर भी विचार किया जाना चाहिए।बार एसोसिएशन के सूत्रों के अनुसार, जिले के अधिवक्ताओं में इस कथित गबन को लेकर व्यापक नाराजगी है और वे मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय कानून के अनुसार प्रत्येक आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार प्राप्त है, इसलिए यदि स्थानीय अधिवक्ता पैरवी से इनकार करते हैं तो आरोपियों के लिए अन्य स्थानों के अधिवक्ता नियुक्त किए जा सकते हैं।

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