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प्रमाण पत्र की बाध्यता में फंसी माध्यमिक शिक्षकों की तबादला प्रक्रिया


लखनऊ प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के तबादलों की चल रही प्रक्रिया एक बार फिर प्रशासनिक अड़चनों में फंसती दिखाई दे रही है। विभाग द्वारा सरप्लस (अधिशेष) शिक्षकों की सूची 18 जून तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।लेकिन निर्धारित समय तक पूरी जानकारी नहीं मिल पाने के कारण इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 21 जून कर दी गई है।माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सरप्लस शिक्षकों के तबादले से संबंधित ऑनलाइन आवेदन समय पर अग्रसारित किए जाएं। विभागीय व्यवस्था के तहत डीआईओएस को इन आवेदनों को ऑनलाइन माध्यम से भेजना था। लेकिन कई जिलों में प्रधानाध्यापक, प्रधानाचार्य और डीआईओएस स्तर पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।स्थिति को देखते हुए विभाग ने समस्याओं और शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समर्पित (डेडीकेटेड) ई-मेल आईडी भी जारी की है। ताकि तबादला प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं की जानकारी सीधे प्राप्त की जा सके।इधर, शिक्षक संगठनों ने तबादला प्रक्रिया में शामिल एक शर्त पर आपत्ति जताई है। संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन के साथ प्रधानाचार्य से यह प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है कि संबंधित शिक्षक के स्थानांतरण के बाद विद्यालय का शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित नहीं होगा। यही शर्त पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।शिक्षक संगठनों के अनुसार अधिकांश प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य ऐसे प्रमाण पत्र जारी करने से बच रहे हैं।क्योंकि शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में किसी शिक्षक के स्थानांतरण से कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके चलते वे शिक्षकों के आवेदन अग्रसारित करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।संगठनों ने विभाग से मांग की है कि इस प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त किया जाए। ताकि पात्र शिक्षकों के तबादला आवेदन बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकें। उनका कहना है कि यदि यह शर्त बरकरार रही तो बड़ी संख्या में शिक्षक तबादले के अवसर से वंचित हो सकते हैं।विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी जिलों से सूचनाएं प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सरप्लस शिक्षकों की सूची और तबादला आवेदनों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।

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