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मालखाने से एक करोड़ से ज्यादा के गहने गायब, पुलिस ने कहा- "बंदर ले गए", कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट


लखनऊ लखीमपुर खीरी जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सदर कोतवाली के मालखाने से एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण गायब होने की बात सामने आई है। इस मामले में पुलिस का दावा है कि गहनों को धूप में सुखाने के दौरान बंदर उठा ले गए थे। पुलिस के इस जवाब पर पीड़ित पक्ष और उनके वकील ने कड़ी आपत्ति जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 में सदर कोतवाली क्षेत्र निवासी मुदित अग्रवाल की पत्नी आभा अग्रवाल ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। उस समय उनके शरीर पर मौजूद आभूषण पुलिस ने कब्जे में लेकर केस प्रॉपर्टी के रूप में मालखाने में जमा करा दिए थे।बताया जाता है कि उस समय मालखाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हेड मोहर्रिर चन्द्रिका पाल का वर्ष 2009 में निधन हो गया था। इसके बाद मालखाने का कार्यभार संभालने वाले दूसरे मोहर्रिर रामबख्श की भी मृत्यु हो गई। पुलिस का कहना है कि इन दोनों कर्मचारियों के निधन के बाद संबंधित पोटली का कोई रिकॉर्ड नहीं मिल पाया और अब यह स्पष्ट नहीं है कि आभूषण कहां गए।पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि आभूषण भीग गए थे, जिन्हें सुखाने के लिए धूप में रखा गया था। इसी दौरान कथित रूप से बंदर उन्हें उठाकर ले गए। पुलिस ने इसी आधार पर जांच पूरी करते हुए अंतिम रिपोर्ट न्यायालय को भेज दी और विवेचना समाप्त कर दी।मामले में वादी पक्ष के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ ने पुलिस की दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केस प्रॉपर्टी थी।जिसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी पुलिस की थी। उन्होंने कहा कि पुलिस का जवाब गुमराह करने वाला प्रतीत होता है और इससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।वहीं, मुदित अग्रवाल ने भी पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय चाहिए। उनका आरोप है कि कोर्ट में उपलब्ध रिकॉर्ड और पुलिस की रिपोर्ट में विरोधाभास है। उन्होंने कहा कि इतने कीमती आभूषणों के गायब होने पर बंदरों को जिम्मेदार ठहराना कई संदेह पैदा करता है।बताया गया कि आभा अग्रवाल की मौत के बाद दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या से जुड़े मामले में मुकदमा चला था। हालांकि बाद में इस मामले में सभी आरोपियों को अदालत से बरी कर दिया गया। इसके बाद जब केस प्रॉपर्टी के रूप में जमा आभूषणों की वापसी की प्रक्रिया शुरू हुई तो उनके गायब होने का मामला सामने आया।मामले में अदालत ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस कोर्ट के समक्ष क्या स्पष्टीकरण पेश करती है और गायब हुए आभूषणों की वास्तविक स्थिति क्या है। पुलिस की "बंदर गहने ले गए" वाली दलील ने न केवल पीड़ित परिवार बल्कि आम लोगों के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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