ब्रेकिंग न्यूज

सेवा से गैरहाजिर डॉक्टर पर एक करोड़ का जुर्माना


लखनऊ उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एक सख्त आदेश ने चिकित्सा महकमे में हलचल मचा दी है। यह मामला उन डॉक्टरों के लिए नजीर माना जा रहा है जो नियमों की अनदेखी करते हैं। पहली बार किसी चिकित्साधिकारी पर पीजी बांड तोड़ने के मामले में इतनी बड़ी वित्तीय कार्रवाई की गई है।जनपद अमरोहा के गांव कोटा निवासी चिकित्साधिकारी डॉ. पीतम सिंह पर शासन ने शिकंजा कसते हुए उनसे एक करोड़ रुपये की धनराशि राजकीय कोष में जमा कराने का आदेश दिया है। यह आदेश चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की महानिदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. रंजना खरे द्वारा जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

डॉ. पीतम सिंह ने 17 अगस्त 2010 को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में चिकित्साधिकारी के पद पर सेवा शुरू की थी। वह रायबरेली जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऊंचाहार में तैनात थे।वर्ष 2017 में उन्होंने नीट पीजी के माध्यम से उच्च शिक्षा के लिए आवेदन किया और 20 जनवरी 2017 को एक करोड़ रुपये का बांड भरा। इसके तहत उन्हें पीजी कोर्स पूरा करने के बाद विभाग में अनिवार्य सेवाएं देनी थीं।उनका चयन लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में एमडी (माइक्रोबायोलॉजी) के लिए हुआ। चार अप्रैल 2017 को उन्हें पीजी अध्ययन हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी जारी कर दिया गया।

कोर्स पूरा, लेकिन ड्यूटी से दूरी

पीजी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद डॉ. पीतम सिंह ने 2 सितंबर 2020 को विभाग में योगदान की सूचना दी। इसके बाद 8 सितंबर 2020 को उनका स्थानांतरण गाजियाबाद के एमएमजी जिला चिकित्सालय में कर दिया गया।हालांकि, जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया और लंबे समय से अनधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित हैं।जब इस मामले की जानकारी शासन को हुई, तो मुख्य चिकित्साधीक्षक एमएमजी अस्पताल गाजियाबाद से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट में अनुपस्थिति की पुष्टि होने के बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया।महानिदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. रंजना खरे ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी अमरोहा को निर्देश दिए हैं कि डॉ. पीतम सिंह से बांड की शर्तों के अनुसार एक करोड़ रुपये की वसूली सुनिश्चित की जाए।

नजीर बनेगा मामला

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई अन्य चिकित्सकों के लिए सख्त संदेश है कि सरकारी नियमों और बांड शर्तों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।यह प्रदेश का पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जिसमें पीजी बांड उल्लंघन पर इतनी बड़ी धनराशि की वसूली का आदेश दिया गया है।

कोई टिप्पणी नहीं