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नोएडा श्रमिक विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, साजिश की आशंका जताई; समाधान के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित


लखनऊ नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों के विरोध और हंगामे के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुजफ्फरनगर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने श्रमिकों और कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और शांति बनाए रखें। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कुछ तत्व प्रदेश की शांति को भंग करने की साजिश रच रहे हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य की "डबल इंजन सरकार" हमेशा श्रमिकों के साथ खड़ी रही है और आगे भी उनके हितों की रक्षा करेगी।उन्होंने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस कठिन समय में सरकार ने श्रमिकों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए विशेष इंतजाम किए थे। “जब पूरा देश संकट में था, हमारी सरकार ने गाड़ियां लगाकर आपको घर पहुंचाया और क्वारंटाइन सेंटर में रहने की व्यवस्था भी की,” उन्होंने कहा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सुरक्षा, सुशासन और सेवा के मॉडल को मजबूत बताया।मुख्यमंत्री योगी ने लोगों को धैर्य बनाए रखने की सलाह देते हुए 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय उद्योग बंद हो रहे थे और मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और गाजियाबाद जैसे जिलों में असुरक्षा का माहौल था। उन्होंने पिछली सरकारों पर भर्तियों में भाई-भतीजावाद के आरोप भी लगाए।श्रमिकों और युवाओं के हित में एक अहम घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को भी मानदेय की गारंटी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के लगभग 60 हजार युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उनके भविष्य को मजबूती मिल रही है।वैश्विक परिस्थितियों पर बोलते हुए सीएम योगी ने भारत की तुलना अन्य देशों से की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालातों के बावजूद भारत में पेट्रोल की कीमतें नियंत्रित हैं। वहीं उन्होंने पाकिस्तान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां की स्थिति बेहद खराब है और लोग बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।इसी बीच, नोएडा में श्रमिक विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर श्रम विभाग ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति श्रमिकों और उद्योगों के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान निकालेगी।इस समिति की अध्यक्षता औद्योगिक विकास आयुक्त करेंगे, जबकि अपर मुख्य सचिव (MSME) और प्रमुख सचिव (श्रम एवं सेवायोजन) इसके सदस्य होंगे। खास बात यह है कि इसमें श्रमिक संगठनों के 5 और उद्योग संगठनों के 3 प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है, ताकि सभी पक्षों की बात सुनी जा सके।सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से औद्योगिक असंतोष कम होगा और प्रदेश में निवेश तथा रोजगार के माहौल को और मजबूती मिलेगी।

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