योगी सरकार की नई ट्रांसफर नीति 2026-27 तैयार, पारदर्शिता और दक्षता पर जोर
सेवा अवधि के आधार पर अनिवार्य तबादले
नई नीति के तहत किसी जिले में तीन वर्ष और मंडल स्तर पर सात वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों का तबादला अनिवार्य होगा। इसके अलावा, जो कर्मचारी लंबे समय से एक ही पद या सीट पर कार्यरत हैं, उन्हें भी दूसरे स्थान या विभाग में भेजा जाएगा। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और प्रशासनिक सुस्ती को रोकने की कोशिश की जाएगी।
तबादलों की सीमा तय नीति में तबादलों की एक सीमा भी निर्धारित की गई है।समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों के लिए अधिकतम 20% तक तबादले किए जा सकेंगे। समूह ‘ग’ और ‘घ’ कर्मचारियों के लिए यह सीमा 10% तय की गई है।हालांकि, विशेष परिस्थितियों में विभागीय मंत्री की अनुमति से इन सीमाओं में वृद्धि की जा सकती है।
दिव्यांग कर्मचारियों को राहत
मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों को सामान्य तबादलों से छूट दी जाएगी। यदि ऐसे कर्मचारी स्वयं स्थानांतरण चाहते हैं, तो उन्हें उनकी पसंद के जिले में प्राथमिकता दी जाएगी।इसके अलावा, जिन कर्मचारियों के परिवार में गंभीर रूप से दिव्यांग सदस्य—विशेषकर मानसिक रूप से अक्षम बच्चे—हैं, उन्हें भी उनकी इच्छा के अनुसार तैनाती देने का प्रस्ताव है।
पति-पत्नी को साथ रखने का प्रयास
सरकारी सेवा में कार्यरत पति-पत्नी को यथासंभव एक ही जिले या आसपास के जिलों में तैनात करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वे पारिवारिक जिम्मेदारियों का बेहतर निर्वहन कर सकें।सख्त प्रावधान और पारदर्शिता पर जोर समूह ‘क’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनाती नहीं दी जाएगी।मंडल स्तर के पदों पर गृह मंडल में पोस्टिंग नहीं होगी।संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कर्मचारियों को संवेदनशील पदों से दूर रखा जाएगा।
आकांक्षी जिलों और विकास खंडों में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरा जाएगा।
विभागाध्यक्षों को तबादला प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा, जिससे प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी बनी रहे।
जल्द लागू होगी नीति
उच्च स्तरीय बैठक में इस मसौदे को मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे कैबिनेट की स्वीकृति के बाद जल्द ही लागू किया जाएगा।सरकार का मानना है कि इस नई नीति से प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा और कर्मचारियों के बीच संतुलित कार्य वितरण सुनिश्चित हो सकेगा।

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