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पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज-वोटर्स को मिलेंगे चार रंग के बैलेट पेपर


लखनऊ यूपी में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है और इसके समय पर होने को लेकर भी संशय बना हुआ है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर चुनाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। चुनाव प्रक्रिया के तहत मतपत्रों की छपाई शुरू हो चुकी है और उन्हें जिलों तक पहुंचाया भी जा रहा है। ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत तक के चुनावों के लिए चार अलग-अलग रंगों के मतपत्र तैयार किए गए हैं, जिससे मतदान कर्मियों और मतदाताओं दोनों को पहचान करने में आसानी हो सके।प्रशासन ने चुनाव में पारदर्शिता और सुगमता बनाए रखने के उद्देश्य से चारों पदों के लिए अलग-अलग रंगों के मतपत्र निर्धारित किए हैं। इसके तहत ग्राम प्रधान के चुनाव के लिए सफेद रंग, ग्राम पंचायत सदस्य के लिए गुलाबी रंग, क्षेत्र पंचायत सदस्य  के लिए नीले रंग और जिला पंचायत सदस्य के लिए पीले रंग का मतपत्र प्रयोग किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग रंगों के उपयोग से मतदान के दौरान मतदाताओं को भ्रम नहीं होगा और वे आसानी से चारों पदों के लिए मतदान कर सकेंगे।मतपत्रों के रंग अलग होने से मतगणना के समय भी बड़ी सुविधा होगी। काउंटिंग के दौरान पदवार मतपत्रों को अलग-अलग छांटने में कम समय लगेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सकेगी। यही वजह है कि इस बार चुनाव प्रबंधन को सुचारू बनाने के लिए रंग आधारित मतपत्र व्यवस्था लागू की गई है।हालांकि चुनाव की तैयारियां तेज हैं। लेकिन आरक्षण निर्धारण को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण का निर्धारण करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन जरूरी है। अभी तक आयोग के गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।जिससे चुनाव के समय पर होने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।ग्राम प्रधानों का कार्यकाल मई महीने में समाप्त हो रहा है, जबकि जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल जुलाई में खत्म होगा। ऐसे में उम्मीद थी कि उससे पहले चुनाव करा लिए जाएंगे।लेकिन पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी के कारण चुनाव टलने की संभावना बढ़ती जा रही है।दरअसल राज्य सरकार ने पहले हाईकोर्ट में हलफनामा देकर पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का आश्वासन दिया था। ताकि आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जा सके। लेकिन अब तक आयोग गठन को लेकर कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है। प्रशासनिक हलकों में भी इस बात की चर्चा है कि यदि जल्द ही आयोग का गठन नहीं होता है तो पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर कराना मुश्किल हो सकता है।फिलहाल प्रशासन चुनावी तैयारियों को जारी रखे हुए है। मतपत्रों की छपाई, मतदान केंद्रों की तैयारी और अन्य व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग गठन और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे या उन्हें आगे बढ़ाया जाएगा।

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