वृद्धावस्था पेंशन योजना में नई व्यवस्था से बढ़ी परेशानी, दस्तावेज़ों की शर्तों ने बुजुर्गों को किया परेशान
लखनऊ वृद्धावस्था पेंशन योजना में हाल ही में किए गए बदलावों ने बुजुर्गों के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के तहत अब आधार कार्ड को आयु प्रमाण के रूप में मान्य नहीं माना जाएगा। इसके स्थान पर लाभार्थियों को अपनी आयु साबित करने के लिए शैक्षणिक प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।नई व्यवस्था के अनुसार, जिन बुजुर्गों के पास शैक्षणिक प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें कुटुंब रजिस्टर (परिवार रजिस्टर) की नकल जमा करनी होगी। हालांकि, यह नियम जमीनी स्तर पर बड़ी समस्या बनता नजर आ रहा है।ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अधिकांश बुजुर्ग या तो शिक्षित नहीं हैं या उनके पास किसी भी प्रकार का शैक्षणिक प्रमाण पत्र मौजूद नहीं है। ऐसे में वे नया दस्तावेज़ जुटाने में असमर्थ हैं। दूसरी ओर, कई परिवारों में कुटुंब रजिस्टर में नाम दर्ज नहीं होने या रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण उसकी नकल भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।बुजुर्गों का कहना है कि पहले आधार कार्ड के जरिए आसानी से पेंशन का लाभ मिल जाता था, लेकिन अब नई प्रक्रिया ने उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पर मजबूर कर दिया है। कई लोगों को यह भी नहीं पता कि आवश्यक दस्तावेज़ कहां से और कैसे प्राप्त किए जाएं।सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि इसका सबसे अधिक असर गरीब और अशिक्षित बुजुर्गों पर पड़ रहा है। उनका सुझाव है कि आधार कार्ड या अन्य सरल दस्तावेज़ों को फिर से मान्यता दी जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों को पेंशन मिलने में कोई बाधा न हो।वहीं, समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था पारदर्शिता और सही लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि प्रारंभिक स्तर पर कुछ समस्याएं सामने आ रही हैं, जिन्हें जल्द ही दूर करने का प्रयास किया जाएगा।फिलहाल, इस बदलाव ने हजारों बुजुर्गों की चिंता बढ़ा दी है। जो अपनी आजीविका के लिए पेंशन पर निर्भर हैं।

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