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सुलतानपुर में जिस इलाके में तेज आवाज में बजेगा डीजे उस इलाके के एसडीएम व क्षेत्र अधिकारी होंगे जिम्मेदार


सुलतानपुर तीज त्योहार में शादी विवाह के पर्व में तेज आवाज में डीजे बजाने की परंपरा ने जोर पकड़ लिया है उस पर विभिन्न समुदायों के आपसी कंपटीशन ने आग में घी का काम किया है । किसी त्योहार में यदि 10 बक्से वाला साउंड का डीजे बज जाए तो अगले समुदाय के त्यौहार में कंपटीशन बस 20 बक्से का डीजे बजाना तय है । शहर हो या देहात डीजे बजाकर उन्माद में नारे लगाने व रात भर नशे में टल्ली होकर मौज मस्ती के गानों पर डांस करने तक ही आज की धार्मिक परंपराएं सिमट रही है । दिल दहलाती आवाज हृदय की धड़कन को अंदर तक झकझोर देने वाले बेस बीट व कानों के परदे उड़ा देने वाली हाइस की आवाज़ से अब शहर वासियों का दम घुटने लगा है । यूपी अपराध निरोधक समिति की त्योहारों के पूर्व बैठक में इस पर लेकर गंभीर चर्चा हुई । जिनके परिवार में बुजुर्ग है और वह हार्ट बीपी या किसी ऐसे गम्भीर रोग से ग्रसित है उनके इलाज में गाढ़ी कमाई का हजारों रुपया खर्च हो रहा है उनके लिए यह डीजे यमराज के भैंसे से कम नहीं है । रोटी रोजगार का हवाला देकर लोगों की जिंदगियों से खेलने वाले डीजे संचालक कहीं ना कहीं कानून के शिकंजे में है । शासन द्वारा दिए गए शासनादेश का निरंतर उल्लंघन कर रहे हैं । हाल में संपन्न हुए त्योहार पर शोर भारी रहा आयोजन समितियो को कंट्रोल करने वाली संस्थाएं समारोह के दौरान बेबस नजर आईं । कई स्थानों पर डीजे संचालको समिति के आयोजकों और व्यवस्था समितियो के बीच झड़प भी हुई । स्थानीय पुलिस को कंट्रोल करने के लिए डंडे फटकने पड़े वहीं कोतवाली में लाकर डीजे को बंद भी करना पड़ा । कुल मिलाकर धार्मिक त्योहारों की सुंदरता को बिगाड़ने में इस भूकंप रथ का बड़ा योगदान है । मौज मस्ती के नाम पर हजारों बुजुर्गों की जिंदगियों को खतरे में डालने वाली इस परंपरा को रोकने के लिए अब प्रशासन सख्त होने की तैयारी कर रहा है । शहर की जनता जो धार्मिक आस्था में विश्वास रखती है वह जिला प्रशासन की ओर इस डीजे पर पूर्णतया रोक लगाने को लेकर आशा भरी नजरों से देख रहा है । सप्ताह भर बाद शुरू होने वाले नवरात्र महोत्सव और पखवाड़े भर बाद स्थापित होने वाली दुर्गा प्रतिमाओं व पूरे महोत्सव के दौरान साउंड सिस्टम की क्या स्थिति होगी इस पर समीक्षा का दौर जारी है । तरह-तरह के बयान जारी किए जा रहे हैं जबकि प्रशासन का अपना मत है की कानून और शासनादेश के इतर कोई भी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी । देखना यहां है त्योहारों के पूर्व जिला प्रशासन डीजे पर कंट्रोल करने के लिए कोई मुहिम चलाता है या दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान हजारों बुजुर्गों की जिंदगियों को खतरे में डाल देता है । समीक्षा और चर्चा महोत्सव के बाद जिले की जनता जरूर करेगी । इस बार कई अधिवक्ताओं ने मन बनाया है कि यदि दुर्गा पूजा महोत्सव में आस्था के नाम पर डीजे का नंगा नाच किया गया तो जिला प्रशासन को कोर्ट में घसीटने से नहीं चूकेंगे । बड़ा सवाल यह है की जिला प्रशासन अपने स्तर से तेज आवाज भूकंप की बेस पर रोक लगा पायेगा है या त्योहार के बाद हाई कोर्ट में खड़ा होकर जवाब देगा । वहीं सामाजिक संस्था उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति की बैठक में दर्जनों पदाधिकारियो ने डीजे पर रोक लगाने के लिए आंदोलन छोड़ने की चेतावनी दी है। सभी ने एक सुर में जिला प्रशासन के साथ मिलकर इस भयावह बीमारी को धार्मिक उत्सव से दूर करने का निर्णय लिया है । कुल मिलाकर इस बार डीजे की भयानक आवाज से दहशत में आने वाले बुजुर्ग आर पार की लड़ाई के मूड में दिख रहे हैं । कुल मिलाकर आने वाला समय किस पर भारी पड़ेगा यह देखने का विषय होगा ।

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