यूपी कैबिनेट की बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को यूपी सरकार की कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। बैठक में पशुपालन क्षेत्र को किसानों की आय बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बनाने, पशु उत्पादों के मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही अंतर्देशीय जल परिवहन को व्यवस्थित करने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कैबिनेट की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियम-2026 लागू किए जाने की जानकारी भी दी गई।कैबिनेट बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन के मामले में देश में पहले स्थान पर है। इसके अलावा प्रदेश अंडा, ऊन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हालांकि, इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादों के मूल्य संवर्धन, डिजिटल प्रबंधन और संगठित बाजार व्यवस्था को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।सरकार का उद्देश्य पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनाना है। इसके लिए प्रस्तावित स्टेट लैब स्टार्ट मिशन के माध्यम से रोजगार सृजन और उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और पशु उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की योजना है।इस पहल के तहत पशुपालन से जुड़े किसानों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के साथ उत्पादन से लेकर बाजार तक की व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा, जिससे पशुपालन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।योजना के तहत उन्नत नस्ल के पशुओं को प्रोत्साहित करने और गायों की नस्ल में सुधार के लिए विशेष उपाय किए जाने का प्रावधान है। दूध उत्पादन में वृद्धि के उद्देश्य से प्रति गाय प्रतिदिन औसतन 10 लीटर दूध उत्पादन तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इसके अलावा मुर्गी पालन और बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य पशुपालन को केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए इसे रोजगार और आय के स्थायी साधन के रूप में विकसित करना है।पशुपालन क्षेत्र में बेहतर नस्ल, उत्पादन क्षमता, तकनीकी प्रबंधन और बाजार की उपलब्धता पर ध्यान दिए जाने से किसानों तथा पशुपालकों को लाभ पहुंचाने की योजना है।कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियम-2026 को भी मंजूरी दी गई। इसके लागू होने से प्रदेश में नदियों और अन्य अंतर्देशीय जलमार्गों पर संचालित होने वाले जहाजों तथा नावों के परिचालन के लिए नियामकीय व्यवस्था स्थापित होगी।कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह ने नियम लागू किए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि इससे पहले प्रदेश के जलमार्गों पर जहाजों और नावों के संचालन के लिए इस प्रकार की विशेष नियमावली नहीं थी। अब मशीनीकृत और गैर-मशीनीकृत जलयानों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में नियम लागू किए गए हैं।उन्होंने बताया कि पहली श्रेणी में मशीनीकृत जलयान शामिल होंगे। इनमें इंजन से चलने वाले स्टीमर और बड़े जहाज जैसे जलयान आएंगे। दूसरी श्रेणी में गैर-मशीनीकृत जलयान शामिल होंगे, जिनमें स्थानीय स्तर पर निर्मित पारंपरिक नावें आती हैं। इनमें से कुछ नावों में अब मोटर भी लगाई जा रही हैं।नई व्यवस्था के तहत दोनों श्रेणियों के जलयानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। इससे जल परिवहन से जुड़े जलयानों की पहचान और उनके संचालन को निर्धारित नियमों के दायरे में लाने में मदद मिलेगी।मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, भारत सरकार की ओर से स्थापित अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के लिए भी अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण का गठन किया गया है।इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश में अंतर्देशीय जल परिवहन से संबंधित गतिविधियों को व्यवस्थित करना और जलमार्गों के संचालन के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करना है। नियमावली के माध्यम से मशीनीकृत और पारंपरिक नावों के पंजीकरण सहित उनके परिचालन को निर्धारित व्यवस्था के अंतर्गत लाया जाएगा।उत्तर प्रदेश में नदियों और अन्य जलमार्गों की उपलब्धता को देखते हुए अंतर्देशीय जल परिवहन को व्यवस्थित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन नियमों के क्रियान्वयन और जल परिवहन सुविधाओं के विकास के बाद किया जा सकेगा।कैबिनेट के इन फैसलों में कृषि से जुड़े सहायक व्यवसायों को बढ़ावा देने और परिवहन व्यवस्था को नियमन के दायरे में लाने पर विशेष ध्यान दिखाई देता है। पशुपालन क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को बाजार से जोड़ने और मुर्गी पालन तथा बकरी पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की योजना है।वहीं, उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियम-2026 के माध्यम से जलमार्गों पर संचालित होने वाले जलयानों के पंजीकरण और परिचालन के लिए व्यवस्था निर्धारित की गई है।कुल मिलाकर, मंगलवार की कैबिनेट बैठक में मंजूर 22 प्रस्तावों के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और अंतर्देशीय जल परिवहन को नियमानुसार संचालित करने से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले सामने आए हैं।

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