स्कूल वाहनों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, DM को समितियां गठित करने के निर्देश
लखनऊ उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने मुख्य सचिव को जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति (डीएसवीएससी) की नियमित बैठकें सुनिश्चित कराने और स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों (एसटीएससी) के कामकाज की निगरानी करने का निर्देश दिया है।न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा तथा स्कूली वाहनों के सुरक्षित संचालन का मुद्दा उठाया गया था।अदालत ने जिलाधिकारियों को उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमों की धारा 222जी के तहत गठित विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का विधिवत गठन सुनिश्चित करने को कहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गठित समितियां निर्धारित नियमों के अनुसार अपने दायित्वों का निर्वहन करें।मुख्य सचिव को अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने होंगे। वहीं, सभी जिलाधिकारियों को आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट एक माह के भीतर प्रस्तुत करनी होगी।हाईकोर्ट ने जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति की नियमित बैठकों के साथ-साथ स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों के प्रदर्शन की निगरानी करने को भी कहा है। इसका उद्देश्य स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाना और नियमों के पालन की स्थिति पर नजर रखना है।सुनवाई के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन और डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी 15 सितंबर को अदालत में उपस्थित हुए थे। परिवहन आयुक्त ने उत्तर प्रदेश मोटर वाहन (छब्बीसवां संशोधन) नियम, 2019 का अध्ययन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।उन्होंने बताया कि नियम 222ए के तहत स्कूली वाहनों के लिए परमिट अनिवार्य है। इसमें शिक्षण संस्थानों द्वारा संचालित वाहनों और निजी बसों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। वहीं, नियम 222ई के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति को स्कूली वाहनों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।अदालत को बताया गया कि नियम 222जी के तहत विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति के गठन का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में ऐसी कोई समिति कार्यरत नहीं है। इसी स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने समितियों के गठन और उनके प्रभावी संचालन को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।मामले में हाईकोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (आईसीएसई) को भी पक्षकार बनाया है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

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