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एक पैर के सहारे 400 मीटर स्कूल पहुंचती थी सात वर्षीय रागिनी, अब ट्राई साइकिल से आसान होगी राह


बलिया सड़क दुर्घटना में एक पैर गंवाने के बावजूद सात वर्षीय रागिनी राजभर ने पढ़ाई का सपना नहीं छोड़ा। आर्थिक तंगी और शारीरिक परेशानी के बीच रागिनी एक पैर के सहारे करीब 400 मीटर की दूरी फुदक-फुदक कर तय करते हुए प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा पहुंचती थी। हाल ही में कक्षा एक में उसका पंजीकरण हुआ है।

रागिनी के जज्बे की जानकारी सामने आने के बाद अब प्रशासन और समाज के लोग उसकी मदद के लिए आगे आए हैं।रागिनी के पिता देवेंद्र राजभर मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि मां बबीता गृहिणी हैं। सीमित आमदनी के कारण परिवार के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही मुश्किल है। ऐसे में रागिनी के लिए कृत्रिम पैर अथवा अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराना परिवार के लिए आसान नहीं था।परिवार के मुताबिक, सड़क दुर्घटना में रागिनी का पैर गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे बचाने के लिए स्वजन ने उपचार के हरसंभव प्रयास किए, लेकिन डॉक्टरों को उसका पैर काटना पड़ा। हादसे के बाद माता-पिता उसे अकेले स्कूल भेजने से डरते थे। जब भी संभव होता, वे उसे गोद में लेकर विद्यालय पहुंचाते थे। मजदूरी के कारण कई बार दोनों उसके साथ स्कूल नहीं जा पाते थे।इसके बावजूद रागिनी ने पढ़ाई की इच्छा नहीं छोड़ी। पड़ोस के बच्चों को स्कूल जाते देखकर उसके मन में भी विद्यालय जाने और पढ़ने की चाह लगातार बनी रही। आखिरकार उसने किसी पर निर्भर रहने के बजाय एक पैर के सहारे खुद स्कूल जाने का फैसला किया। करीब 400 मीटर की दूरी वह फुदक-फुदक कर तय करती और विद्यालय पहुंचती थी।रागिनी के संघर्ष और हौसले का वीडियो सामने आने के बाद उसकी मदद के लिए कई लोग आगे आए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमित पाल यादव ने बताया कि विद्यालय की ओर से भी छात्रा को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा और उसकी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।छात्रा की स्थिति की जानकारी जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह को हुई तो उन्होंने तत्काल मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह, दिव्यांगजन अधिकारी राजन कुमार सहित संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर रागिनी और उसके परिवार की स्थिति की विस्तृत जानकारी हासिल कराई।बुधवार को छात्रा को ट्राई साइकिल और पाठ्य सामग्री भेंट की गई। ट्राई साइकिल मिलने के बाद रागिनी के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। अब उसके लिए विद्यालय तक पहुंचना पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा।बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि रागिनी को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही उसे प्रतिवर्ष 2,000 रुपये की छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाएगी। संबंधित विद्यालय को निर्देश दिए गए हैं कि छात्रा को विद्यालय में किसी प्रकार की असुविधा न हो और उसकी जरूरत के अनुसार सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।रागिनी की कहानी यह बताती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत हौसले के आगे मुश्किलें छोटी पड़ जाती हैं। एक पैर गंवाने के बाद भी शिक्षा की राह पर आगे बढ़ने का उसका संकल्प अब प्रशासनिक मदद से और मजबूत हुआ है।

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