17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रदेशभर में लगेंगे वितरण शिविर, सीएम करेंगे पात्र दिव्यांगजनों को लाभान्वित
लखनऊ प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने अपने सरकारी कार्यालय में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण एवं सशक्तीकरण के लिए किए जा रहे कार्यों और योजनाओं का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए।मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण एवं विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है और बड़ी धनराशि भी खर्च की जा रही है। इसके बावजूद योजनाओं की जानकारी आम जनता तक अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार को प्राथमिकता दी जाए, ताकि पात्र दिव्यांगजन सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठा सकें।उन्होंने बताया कि 17 सितंबर 2026 को एक भव्य आयोजन के माध्यम से मुख्यमंत्री द्वारा विभागीय योजनाओं के पात्र दिव्यांगजन लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 75 जनपदों में मंडल एवं जिला स्तर पर भी बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में सांसद, विधायक, प्रभारी मंत्री, जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी तथा अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। चिन्हित लाभार्थियों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक वितरण शिविर आयोजित किए जाएंगे।समीक्षा के दौरान मंत्री ने दिव्यांग पेंशन योजना की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि योजना के लिए ₹1,47,004.69 लाख का बजट प्राविधानित है। इसके सापेक्ष अब तक ₹31,210.57 लाख, यानी 21.23 प्रतिशत धनराशि व्यय की जा चुकी है और 10,44,022 लाभार्थियों को पेंशन का प्रेषण किया जा चुका है।उन्होंने बताया कि 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले अनुमानित 2.05 लाख से 2.15 लाख लाभार्थियों को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के अंतर्गत भारत सरकार के निर्देशानुसार अब ‘एसएनए स्पर्श मॉड्यूल’ के माध्यम से पेंशन भेजी जा रही है।मंत्री श्री कश्यप ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में कुष्ठावस्था पेंशन योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। योजना के लिए ₹4,860 लाख का बजट आवंटित किया गया है, जिसके सापेक्ष 25.33 प्रतिशत धनराशि व्यय हुई है। अब तक 13,734 लाभार्थियों को ₹1,231.17 लाख का भुगतान किया गया है।योजना की प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के तहत ₹3,840 लाख का बजट प्राविधानित किया गया है। इसके अंतर्गत प्रदेशभर में 989 चिन्हांकन शिविरों की तिथियां निर्धारित कर पात्र दिव्यांगजनों के चिन्हांकन की प्रक्रिया चल रही है। अब तक 27,300 पात्र दिव्यांगजन चिन्हित किए जा चुके हैं।इसी प्रकार निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल योजना के लिए ₹600 लाख का बजट रखा गया है। योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के सभी 75 जनपदों के लिए प्रति जनपद 15 ट्राईसाइकिल के हिसाब से कुल 1,125 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।दिव्यांगजनों के पुनर्वास एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित विभागीय दुकान निर्माण/संचालन योजना की समीक्षा में सामने आया कि अब तक केवल 237 दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया गया है, जो बजट का 22.23 प्रतिशत है।मंत्री ने योजना की धीमी प्रगति पर अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता और लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने को कहा।मंत्री ने विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। प्रदेश की 350 तहसीलों, 18 मंडल मुख्यालयों तथा सात आकांक्षी जनपदों—बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र में स्थायी होर्डिंग्स लगाए जाने के प्रकरण में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी होर्डिंग्स स्थापित होंगी, उतनी ही तेजी से सरकारी योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचेगी और प्रचार-प्रसार के लिए आवंटित धनराशि का सदुपयोग भी सुनिश्चित होगा।श्री कश्यप ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक का युग है। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग करते हुए विभागीय योजनाओं, पात्रता और लाभ लेने की प्रक्रिया की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आज बेहद प्रभावशाली माध्यम है और इसके जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक कम समय में जानकारी पहुंचाई जा सकती है।बैठक में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, निदेशक उमेश प्रताप सिंह, संयुक्त निदेशक विकास शर्मा, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के संयुक्त निदेशक रणजीत सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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