उच्च शिक्षण संस्थानों में हर दिन होगी नशामुक्ति की शपथ, 500 मीटर दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती
लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के आह्वान को जनआंदोलन का स्वरूप देने और ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से विधानसभा परिसर में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों एवं परीक्षा नियंत्रकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उच्च शिक्षण संस्थानों में नशामुक्ति अभियान को प्रभावी, सतत और परिणामोन्मुख बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।बैठक को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि युवा शक्ति विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराई से बचाकर ही प्रदेश और देश के भविष्य को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों को केवल शिक्षा प्रदान करने वाले केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के आधार के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। नशामुक्ति अभियान इसी व्यापक संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा है।बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में प्रत्येक कार्यदिवस की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों को दो मिनट की नशामुक्ति शपथ दिलाई जाएगी। इसके अलावा विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘रन फॉर नशामुक्ति’, मैराथन, पथ संचलन, भाषण, निबंध, चित्रकला, नाटक और नुक्कड़ नाटक जैसी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।शैक्षणिक स्तर पर भी अभियान को विद्यार्थियों की दिनचर्या से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। प्रत्येक शिक्षक सप्ताह में एक बार अपने पीरियड के अंतिम दस मिनट नशामुक्ति विषय पर विद्यार्थियों से संवाद और प्रेरक चर्चा के लिए निर्धारित करेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनमें सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली की भावना विकसित करना है।विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, जीवन मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी स्थलों के शैक्षिक भ्रमण भी कराए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि विद्यार्थियों को रचनात्मक और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर नशे की प्रवृत्ति से दूर रखने में मदद मिलेगी।अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए शिक्षण संस्थानों के परिसरों और सार्वजनिक स्थलों पर होर्डिंग, वॉल पेंटिंग तथा सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही अधिक से अधिक विद्यार्थियों को ‘माय भारत’ पोर्टल से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।नशामुक्ति अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए पूरे प्रदेश को पांच जोन में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन के लिए उच्च शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर पर वरिष्ठ नोडल अधिकारी, महाविद्यालय स्तर पर प्राचार्य और प्रत्येक संकाय स्तर पर अलग नोडल अधिकारी अभियान की नियमित निगरानी करेंगे।इस व्यवस्था के जरिए अभियान की गतिविधियों की समीक्षा, संस्थानों की प्रगति और सामने आने वाली समस्याओं की जानकारी नियमित रूप से प्राप्त की जाएगी।बैठक में नशे की रोकथाम को लेकर कई कड़े फैसले भी लिए गए। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती से रोक सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए संबंधित संस्थानों और प्रशासनिक स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी।इसके अलावा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के हॉस्टलों, कैंटीनों तथा परिसर में नियमित निरीक्षण किए जाएंगे। ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर के माध्यम से आने वाली सामग्रियों की भी संस्थानों के प्रवेश द्वार पर जांच की जाएगी, ताकि नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सके।अभियान के तहत नशे की प्रवृत्ति वाले विद्यार्थियों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके अभिभावकों को भी संस्थान में बुलाकर संवाद स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को दंडित करने के बजाय उन्हें नशे की लत से बाहर निकालकर शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों की ओर वापस लाना है।बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि नशामुक्ति अभियान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न रहकर उच्च शिक्षण संस्थानों की नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बने। शिक्षकों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सामूहिक भागीदारी से अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में काम किया जाएगा।

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