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आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता, पैकेट पर कड़ी चेतावनी की सिफारिश

 


देश में आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों के बढ़ते उपयोग को लेकर स्वास्थ्य नियामकों ने गंभीर चिंता जताई है। केंद्र सरकार के औषधि तकनीक सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) ने सिफारिश की है कि लेवोनोर्गेस्ट्रेल आधारित इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियों के पैकेट पर स्पष्ट और प्रमुख चेतावनी लिखी जाए कि इनका इस्तेमाल महीने में दो बार से अधिक नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी बताया जाए कि यह गोली एचआईवी या अन्य यौन संचारित संक्रमणों से सुरक्षा नहीं देती।बोर्ड ने सुझाव दिया है कि दवा के पैकेट और उसके साथ दिए जाने वाले जानकारी पत्रक में यह चेतावनी प्रमुखता से अंकित हो। इसके अलावा सुरक्षित यौन संबंध के लिए अन्य गर्भनिरोधक उपाय अपनाने की सलाह भी दी जाएगी। ताकि लोग इसे नियमित गर्भनिरोधक के विकल्प के रूप में इस्तेमाल न करें।विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी युवाओं के बीच इमरजेंसी पिल का उपयोग तेजी से बढ़ा है। कई मामलों में इसे नियमित गर्भनिरोधक के विकल्प की तरह लिया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं माना जाता।महिला जिला अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डाक्टर के अनुसार इमरजेंसी पिल केवल आपात स्थिति में गर्भधारण रोकने के लिए बनाई गई दवा है। बार-बार इसका सेवन करने से शरीर में हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म में अनियमितता और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। उनका कहना है कि नियमित गर्भनिरोधक के लिए डॉक्टर की सलाह लेकर सुरक्षित और वैज्ञानिक विकल्प अपनाना बेहतर होता है।इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोली असुरक्षित यौन संबंध के बाद गर्भधारण को रोकने के लिए दी जाने वाली आपातकालीन दवा है। इसे संबंध बनने के 72 घंटे के भीतर लेने पर यह सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती है। इन गोलियों में मुख्य रूप से लेवोनोर्गेस्ट्रेल नामक हार्मोन होता है, जो गर्भधारण की संभावना को कम करने में मदद करता है। हालांकि विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यह नियमित गर्भनिरोधक का विकल्प नहीं है।इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने 0.75 मिलीग्राम और 1.5 मिलीग्राम लेवोनोर्गेस्ट्रेल टैबलेट को ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल-के में शामिल करने का भी सुझाव दिया है। ऐसा होने पर इन दवाओं की बिक्री और उपयोग से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट हो जाएंगे। भारत में शेड्यूल के तहत आने वाली दवाओं की बिक्री और वितरण विशेष नियमों के अनुसार किया जाता है।केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन  के अधिकारियों ने बताया कि 16 फरवरी को भारत की स्वास्थ्य महानिदेशक डाक्टर की अध्यक्षता में हुई औषधि तकनीक सलाहकार बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई थी। बैठक में मिली सिफारिशों के आधार पर जल्द ही राज्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और लोगों में सुरक्षित यौन व्यवहार को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी।

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