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अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर सुलतानपुर पुलिस को मिला विशेष प्रशिक्षण, मूक-बधिरों से संवाद की सीख


सुल्तानपुर अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर बुधवार को रिजर्व पुलिस लाइन सभागार में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पुलिस अधीक्षक  विनीत जायसवाल के निर्देशन में अयोध्या डिवीजन एसोसिएशन ऑफ द डेफ द्वारा किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना तथा श्रवण बाधित एवं मूक-बधिर व्यक्तियों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने की क्षमता विकसित करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को बताया गया कि ऐसे नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं को समझने के लिए किस प्रकार सांकेतिक भाषा का प्रयोग किया जा सकता है।प्रशिक्षण कार्यक्रम में सांकेतिक भाषा के महत्व और पुलिसिंग के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। पुलिसकर्मियों को श्रवण बाधित एवं मूक-बधिर व्यक्तियों के साथ संवाद स्थापित करने, उनकी बात समझने तथा उनकी शिकायतों को प्रभावी ढंग से सुनने के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई।कार्यशाला के माध्यम से पुलिस सेवाओं तक दिव्यांगजनों की सुगम पहुंच सुनिश्चित करने और उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार विकसित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि पुलिस और आम नागरिक के बीच बेहतर संवाद कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पीड़ितों और जरूरतमंदों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी महत्वपूर्ण है।सांकेतिक भाषा के प्रशिक्षण से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को श्रवण बाधित और मूक-बधिर नागरिकों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। इससे पुलिसिंग में संवेदनशीलता और समावेशिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।पुलिस विभाग की ओर से सभी वर्गों के नागरिकों को सुलभ, संवेदनशील और प्रभावी पुलिस सेवा उपलब्ध कराने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई। कार्यशाला को समावेशी पुलिसिंग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।

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